मणिपुर सशस्त्र संगठन की चेतावनी-कुकी को बाहर करें

मणिपुर सशस्त्र संगठन की चेतावनी-कुकी को बाहर करें

पिछले साल 3 मई से हिंसा में सुलग रहे मणिपुर में मैतेई फिर एकजुट होने लगे हैं। चार विलेज वॉलेंटियर की हत्या से गुस्साए इस समुदाय ने बुधवार (24 जनवरी) को बड़ी बैठक की। इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से नागा शांति वार्ता के मध्यस्थ एके मिश्रा, इंटेलीजेंस ब्यूरो के दो ज्वाइंट डायरेक्टर मंदीप सिंह तुली, राजेश कुम्बले समेत 37 मैतेई विधायक, दो सांसद, केंद्रीय राज्य मंत्री आरके रंजन सिंह मौजूद थे।

संगठन ने सभी को चेतावनी दी है कि हमारी चार मांगें हैं। इन पर 15 दिन में कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो आगे फैसला हम लेंगे। जिस समय यह बैठक चल रही थी, तब किले के अंदर और बाहर 10 हजार से ज्यादा मैतेई फैसले के इंतजार में खड़े थे।

संगठन ने केंद्रीय प्रतिनिधियों को जो मांग पत्र सौंपा है, उस पर राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह समेत सभी मैतेई जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं।

इमोशनल मैसेज... अब फैसले की घड़ी है
मीटिंग के बाद संगठन के नेता कौरौन्बा खुमान ने किले के पश्चिमी गेट से इंफाल के सबसे बड़े महिला बाजार इमा मार्केट तक एक जुलूस भी निकाला, जिसमें सैकड़ों हथियारबंद लोग शामिल हुए। मार्केट में जमा भीड़ के समक्ष खुमान ने इमोशनल भाषण भी दिया। कहा- अब फैसले की घड़ी आ गई है। एकजुट हो जाएं। राज्य के मुख्यमंत्री सहित सभी कानून निर्माता नागरिकों से ऊपर नहीं हैं।

गौरतलब है कि केंद्रीय प्रतिनिधि 22 जनवरी को इंफाल पहुंच गए थे। उन्होंने दो दिन मैतेई प्रतिनिधियों से बात की और मीटिंग टालने की कोशिश की, लेकिन अराम्बाई टैंग्गोल नहीं माना। संगठन ने साफ कह दिया है कि राज्य में हम अपनी समस्याओं के लिए बार-बार दिल्ली का दखल बर्दाश्त नहीं करेंगे।

संगठन की 4 मांगें: बॉर्डर सील करें, बाहरियों को निकालें

कुकी संगठनों के साथ चल रही केंद्र की बातचीत (सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स) तुरंत बंद हो।

मणिपुर में घुसे म्यांमारी कुकी लोगों को मिजोरम में शिफ्ट करें। बॉर्डर तुरंत सील करें।

राज्य में वर्ष 1951 को आधार बनाकर एनआरसी लागू करें, ताकि बाहरियों को बाहर का रास्ता दिखा सकें।

असम राइफल्स को राज्य से तुरंत हटाया जाए।

मणिपुर में अब तक 200 से ज्यादा मौतें, 1100 घायल

राज्य में 3 मई से कुकी और मैतेई के बीच जारी जातीय हिंसा में 200 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। राज्य में अब तक 65 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं। 6 हजार मामले दर्ज हुए हैं और 144 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।


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