मध्य प्रदेश सरकार बताएगी, इंदौर के यातायात सुधारने के लिए क्या किया

मध्य प्रदेश सरकार बताएगी, इंदौर के यातायात सुधारने के लिए क्या किया

इंदौर। शहर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था को लेकर गुरुवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होना है। सरकार को कोर्ट में बताना है कि इंदौर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए उसने क्या प्रयास किए। कोर्ट ने शासन को यातायात सिग्नल 24 घंटे चालू रखने और प्रमुख चौराहों पर दो पुलिसकर्मियों की अनिवार्य रूप से तैनाती के आदेश दिए थे। अब यह सरकार के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस आदेश का कितना पालन हुआ है। आदेश 14 अक्टूबर 2019 को दिया गया था।

हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने दायर की है। याचिका में कहा है कि शहर में 13 एक्सीडेंट जोन चिह्नित हुए थे। शहर में होने वाले ज्यादातर हादसे यहीं पर होते हैं, बावजूद इसके ऐसा कोई इंतजाम नहीं किया गया जिससे इन हादसों को रोका जा सके। रात के वक्त तो शहर के सभी यातायात सिग्नल बंद कर दिए जाते हैं। दिन के वक्त भी बिजली गुल की स्थिति में यातायात सिग्नल में बैकअप की कोई व्यवस्था नहीं रहती है।


हाई कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2019 को आदेश दिया था कि शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नल 24 घंटे चालू रखे जाएं और शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर सुबह 8 से 12 और शाम 5 से रात 11 बजे तक कम से कम दो-दो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाए ताकि यातायात व्यवस्था बिगड़े नहीं। कोर्ट ने शासन से कहा है कि वह शपथ पत्र पर बताए कि 14 अक्टूबर 2019 को दिए आदेश का पालन हो रहा है या नहीं। गुरुवार को शासन की ओर से शपथ पत्र प्रस्तुत हो सकता है। इस शपथ पत्र के प्रस्तुत होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि वास्तविकता क्या है और शासन कोर्ट में क्या बता रहा है।

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