बता दें कि छह माह पहले प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव हो जाना था लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम को लेकर सहमति बन पाने के कारण चुनाव टल गया। फिर पहलगाम आतंकी हमले के बाद बनी परिस्थितियों के कारण चुनाव टल गया। अब स्थिति सामान्य है, ऐसे में चुनाव की प्रक्रिया संपन्न कराई जा सकती है।
मध्य प्रदेश को मिल सकता है आदिवासी या महिला नेतृत्व
प्रदेश में सामान्य वर्ग से वर्तमान में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हैं। वहीं ओबीसी मुख्यमंत्री और अनुसूचित जाति वर्ग से उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष की कमान आदिवासी या महिला के हाथों में सौंपी जा सकती है। हालांकि यह केंद्रीय नेतृत्व ही तय करेगा।
मध्य प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए प्रदेश परिषद के सदस्य भी चुने गए
प्रदेश में भाजपा जिला अध्यक्षों की घोषणा के साथ ही प्रदेश परिषद के सदस्य भी चुने गए थे। दो विधानसभा क्षेत्र पर एक क्लस्टर बनाकर प्रदेश परिषद का सदस्य चुना गया। प्रदेश में जितनी विधानसभा सीट एससी या एसटी के लिए आरक्षित हैं, उतनी संख्या में उसी वर्ग के सदस्य प्रदेश परिषद के लिए चुने गए।
कुल 345 प्रदेश परिषद सदस्यों के चयन में महिला, एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग का भी ध्यान रखा गया। अब यह प्रदेश परिषद के सदस्य मिलकर नया प्रदेश अध्यक्ष चुनेंगे। मध्य प्रदेश में अधिकतर बार सर्वसम्मति से ही प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है।
दो बार बनी मतदान की स्थिति
अपवाद के रूप में केवल दो बार संगठन चुनाव में मतदान की स्थिति बनी है। पहली बार 1990 के दशक में पार्टी द्वारा प्रदेश अध्यक्ष के लिए तय प्रत्याशी लखीराम अग्रवाल के विरुद्ध पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी संगठन चुनाव में खड़े हुए थे। दूसरी बार वर्ष 2000 में शिवराज सिंह चौहान और विक्रम वर्मा के बीच प्रदेश अध्यक्ष के लिए चुनाव हुआ था। इसमें विक्रम वर्मा ने शिवराज सिंह चौहान को हरा दिया था।











