समाज की रचना मानव जीवन के बेहतरी के लिए हुई। ताकि मानव समाज में रहकर सुरक्षित सुनिश्चित और आरामदायक जीवन व्यतीत कर सकें। जागरूक समाज मैं रहकर व्यक्ति को आगे आने के कई अवसर होते हैं और उसे अकेले कोई कष्ट उठाना नही पड़ता है, उसकी खुशी में भी कई लोग साथ होते हैं। परंतु आजकल समाज का वह रूप प्रदूषित हो चुका है समाज में अवैध तरीके से कमाए पैसे और ताकतवर का मूल्यांकन भी ज्यादा हो गया। इंसान डर भय और लालच के कारण ऐसे लोगों को समाज का मुखिया स्वीकार लेते हैं, जिनसे मानव जाति को खतरा भी हो सकता है। समाज में हमें किसका बहिष्कार करना चाहिए इस विषय पर हम चुप रहते हैं। जो देश विरोधी गतिविधि, गैरकानूनी व्यवहार करने वाले, हिंसक और भ्रष्टाचारी, लालची प्रवृत्ति के लोग इनका हमें बहिष्कार करना चाहिए। परंतु ऐसे बलशाली लोगों के सामने समाज झुक जाता है, विरोध में आवाज नहीं उठाते है, उनका बहिष्कार नहीं करते है। समाज में रहने वालों को समझना होगा कि उन्हें कैसा समाज चाहिए और गलत लोगों को समाज से बहिष्क्रत भी करे, तभी हम एक उत्कृष्ट जीवन शैली का हिस्सा बन सकेंगे।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्) ये लेखक के अपने विचार है I
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