भोपाल। आज पितृमोक्ष अमावस्या है। इस दिन सूर्यग्रहण का भी संयोग बन रहा है। साल का यह आखिरी सूर्यग्रहण एन्युलर या वलयाकार होगा, लेकिन भारत में यह दिखाई नहीं देगा। आज शनिवार की शाम भारत में जब सूर्य अस्त होता दिखेगा, तब कुछ देर बाद मेक्सिको, सेंट्रल अमेरिका, कोलंबिया, ब्राजील आदि में वलयाकार सूर्यग्रहण दिखेगा। ग्रहण पथ दक्षिणी कनाडा के तट से प्रशांत महासागर में शुरू होगा। वहीं एक पखवाड़ा बाद 28 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण होगा, जो भारत में भी दिखेगा।
ग्रहण का समय
सूर्यग्रहण के बारे में जानकारी देते हुए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि भारतीय समय के अनुसार रात आठ बजकर 33 मिनिट 50 सेकंड पर ग्रहण की घटना आरंभ होगी । रात 11 बजकर 29 मिनट 32 सेकंड पर यह अधिकतम ग्रहण की स्थिति में होगा। इसके बाद रात दो बजकर 25 मिनट 16 सेकंड पर यह समाप्त हो जाएगा। ग्रहण के समय भारत में रात होने से यह घटना यहां नहीं दिखेगी।
दुनिया में 13 फीसदी आबादी देख सकेगी ग्रहण
सारिका ने बताया कि एक गणितीय अनुमान के अनुसार पश्चिमी देशों में होने जा रही इस खगोलीय घटना का कुछ न कुछ भाग विश्व की लगभग 13 प्रतिशत से अधिक आबादी देख सकेगी, वहीं वलयाकार ग्रहण की स्थिति को केवल 0.41 प्रतिशत आबादी ही देख सकेगी।
वलयाकार सूर्यग्रहण की स्थिति
सारिका ने बताया कि एन्युलर या वलयाकार सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता है, क्योंकि वह पृथ्वी से दूर होता है। इस स्थिति में चंद्रमा के चारों ओर प्रकाश का एक घेरा बन जाता है। वलयाकार ग्रहण के दौरान सूर्य का कोरोना नहीं दिखाई देता है।
ग्रहण के बारे में कुछ खास
- एक साल में अधिकतम पांच सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण हो सकते हैं।
- एक साल में न्यूनतम दो सूर्यग्रहण तो होंगे ही।
- सामान्य रूप से साल में चार ग्रहण होते हैं।











