कमल नाथ सोशल मीडिया पर सक्रिय… तो दिग्विजय मैदान में, राजनीतिक भविष्य पर संशय

कमल नाथ सोशल मीडिया पर सक्रिय… तो दिग्विजय मैदान में, राजनीतिक भविष्य पर संशय
भोपाल। कांग्रेस के दिग्गज नेता कमल नाथ और दिग्विजय सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर संशय बरकरार है। दोनों की आगामी भूमिका को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। एक समूह यह मानने वालों का है कि अब दोनों ही नेताओं को प्रदेश की राजनीति से दूर कर दिया गया है। यह अलग बात है कि दोनों अलग-अलग तरह से सक्रियता दिखा रहे हैं।विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पराजय झेलने के बाद से पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने अपने आप को केवल इंटरनेट मीडिया पर प्रतिक्रिया तक समेट लिया है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मैदान में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

प्रदेश में कहीं कांग्रेस के आंदोलन हों या बैठकें, अग्रिम पंक्ति में दिग्विजय सिंह को देखा जा सकता है। दिग्विजय सिंह को राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में करारी हार मिली, लेकिन वह अब भी प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। यह तब है, जब लोकसभा चुनाव में उन्होंने राजगढ़ में अपना अंतिम चुनाव बताकर वोट मांगा था।

मध्य प्रदेश से दूरी बनाए हुए हैं कमल नाथ

विधानसभा चुनाव, 2023 के बाद कमल नाथ के दलबदल की अटकलों ने कांग्रेस संगठन के भीतर उनकी विश्वसनीयता को प्रभावित कर दिया। इसके बाद लोकसभा चुनाव में पराजय झेलने के बाद से कमल नाथ का राजनीतिक भविष्य ही डगमगा गया। लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने बेटे नकुल नाथ को परिवार के गढ़ छिंदवाड़ा में जिताने के लिए पूरी ताकत झोंकी लेकिन अन्य प्रत्याशियों के क्षेत्र में प्रचार करने के बजाय विदेश चले गए।

एक जमीनी नेता रहे तो दूसरे हवाई नेता

कमल नाथ और दिग्विजय सिंह के राजनीतिक जीवन पर गौर किया जाए तो दिखाई देता है कि दिग्विजय हमेशा जमीनी राजनीति करते रहे हैं, जबकि कमल नाथ ने मात्र कुछ खास लोगों की सहायता से राजनीति की। जैसे मालवा अंचल की बात करें तो सज्जन सिंह वर्मा या बाला बच्चन जैसे नेताओं के जरिये कमल नाथ पकड़ बनाते थे।

कमल नाथ केवल छिंदवाड़ा तक सिमटे रहे और महाकौशल के भी वे सर्वमान्य नेता नहीं बन पाए। इसके विपरीत दिग्विजय सिंह राघौगढ़ के जुड़े होने के नाते मध्य भारत और ग्वालियर- चंबल में हमेशा कांग्रेस के बड़े नेता बने रहे।

दिग्विजय ने इंदौर में की थी पढ़ाई

दिग्विजय ने इंदौर में पढ़ाई की थी तो उसके नाते उन्होंने मालवा अंचल में अपने संबंधों को हमेशा जीवंत बनाए रखा। महाकौशल क्षेत्र के नेताओं से भी उनके संबंध नजदीकी रहे। राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा और उनके परिवार के चलते यहां बड़ी संख्या में उनके समर्थक हैं।

दिग्विजय के राजनीतिक गुरु थे अर्जुन सिंह

अर्जुन सिंह को राजनीतिक गुरु मानने के कारण दिग्विजय सिंह की विंध्य अंचल में भी अच्छी पकड़ थी। दोनों की राजनीति का यही बड़ा अंतर है-एक जमीनी नेता रहे तो दूसरे हवाई नेता।

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