उन्होंने कहा कि पिछले दस साल में आदिवासी समाज के बच्चे रोजगार से वंचित थे। भूपेश सरकार ने पिछले दो तीन सालों में रोजगार के कई रास्ते खोले हैं। जिससे होनहार और अपने काबिलियत के दम पर बेरोजगार युवाओं को अब सरकारी नौकरी मिल पा रहे हैं। डिप्टी कलेक्टर के भर्ती मामले में सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए। यदि उनकी गंभीरता नही दिखेंगी तो आदिवासी समाज पत्राचार का रास्ता अख्तियार करेगा और कलेक्टर से मिल कर ज्ञापन सौंपेगे और फिर भी मांगे हमारी पूरी नही हुई तो धरना प्रदर्शन भी करेंगे।
राज्य की भूपेश सरकार युवाओं के लिए सोच रही है और युवा अपनी दमखम के साथ योग्यता को देखते हुए लगातार पीएससी के माध्यम से उनका चयन भी हो रहा है। आदिवासी समाज ने भाजपा नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पीएससी से भर्ती के मामले में भूपेश सरकार को भाजपा नेता सिर्फ और सिर्फ बदनाम करने का काम कर रहे हैं। कभी जांच की मांग करते है तो कभी लेन देन की बात कहते हैं यदि उनके पास इसका पुख्ता प्रमाण है तो वे उसे सामने क्यों नही लाते हैं।











