'जरूरी नहीं कि एक्टर के बेटे में एक्टिंग की काबिलियत हो', नेपोटिज्म पर 'चंपारण मटन' एक्ट्रेस Falak Khan की दो टूक

'जरूरी नहीं कि एक्टर के बेटे में एक्टिंग की काबिलियत हो', नेपोटिज्म पर 'चंपारण मटन' एक्ट्रेस Falak Khan की दो टूक
रंजन कुमार के डायरेक्शन में बनी जातिगत राजनीति और भेदभाव को दिखाती शॉर्ट फिल्म 'चंपारण मटन' काफी दिलचस्प है। ये बिहार में स्थित एक परिवार और उनके रोजमर्रा के संघर्षों की कहानी है, जो चंपारण मटन को पकाने और उसे खाने के मकसद के इर्द-गिर्द घूमती है। ये बिहारी नाम अब पूरे देश में फेमस हो गया है। भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (FTII) की बनाई गई इस फिल्म ने ऑस्कर अवॉर्ड्स के सेमीफाइनल में जगह बना ली है।

इस अवॉर्ड के लिए दुनिया भर के फिल्म संस्थानों की 1,700 से अधिक फिल्मों को नॉमिनेट किया गया था, जिसमें 'चंपारण मटन' भी थी। लीड एक्ट्रेस Falak Khan ने हालिया इंटरव्यू में देश के गांव में बनी फिल्म के बारे में बात की। फलक खान ने MIT मुजफ्फरपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और फिर मुंबई से MBA किया है। मुंबई में रहते हुए फलक ने एडिटिंग सीखा और जो भी प्रोजेक्ट मिले, उन्हें कर लिया।

इंडस्ट्री में नेपोटिज्म पर बोलीं फलक खान

फिल्म की एक्ट्रेस फलक खान ने 'दैनिक भास्कर' के साथ हालिया इंटरव्यू में कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री में नेपोटिज्म पर कहा, 'स्टार किड्स को चांस देना गलत नहीं है, लेकिन मुझे तकलीफ तब होती है जब उनमें एक्टिंग की क्वालिटी नहीं होती है पर फिर भी वे 10-15 फिल्में कर लेते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि एक्टर के बेटे में एक्टिंग की काबिलियत हो।'

'चंपारण मटन' की इमोशनल कहानी

'चंपारण मटन' फिल्म की कहानी कुछ ऐसी है कि लॉकडाउन की वजह से नौकरी छूट जाने के बाद एक कपल अपने गांव लौटता है और उसे हर तरह की समस्या से गुजरना पड़ता है। फिल्म अपने अंत तक काफी इमोशनल भी कर देती है।

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