पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को लेकर चिट्ठी में भुट्टो ने तर्क दिया कि इस संकट का समाधान जबरदस्ती या एक-दूसरे पर आरोप लगाने से नहीं हो सकता है। उन्होंने हिंसा की जांच करने और टकराव की जड़ में मौजूद राजनीतिक और कानूनी मुद्दों की समीक्षा करने के लिए सभी पक्षों की सहमति से एक कमीशन बनाने का प्रस्ताव रखा है।
पहचान पर सवाल गलत: भुट्टो
बिलावल भुट्टो ने पत्र में कहा कि कश्मीरियों की पहचान और सम्मान बिना शर्त हैं। उन्होंने रावलकोट के निवासियों की पहचान पर सवाल उठाने वाले बयानों का कड़ा विरोध किया। बिलावल ने कहा कि इस्लामाबाद में किसी भी अधिकारी को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन कश्मीरी है।भुट्टो ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी राज्य और कश्मीर के लोगों के बीच संबंधों को बुनियादी तौर पर नए सिरे से तय करने की जरूरत है। यह रिश्ता जबरदस्ती, भड़काऊ बयानबाजी या बल प्रयोग के बजाय सहमति, लोकतांत्रिक अधिकारों और आपसी सम्मान पर आधारित होना चाहिए।c
'बातचीत से निकालें रास्ता'
बिलावल भुट्टो ने तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली की व्यवस्था का खाका पेश किया है। उन्होंने JKJAAC से अपने प्रस्तावित लॉन्ग मार्च और धरने को कुछ समय के लिए टालने की अपील की है। साथ ही उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से आग्रह किया कि जब तक प्रस्तावित आयोग अपना काम पूरा ना कर ले, तब तक वे कोई कार्रवाई ना करें।भुट्टो ने कहा कि मौजूदा गतिरोध को टकराव से खत्म नहीं किया जा सकता। बातचीत ही चीजों को बेहतर करने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है। भुट्टो ने कहा कि संयम बरतने की उनकी अपील का मतलब यह नहीं है कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगें छोड़ दें। यह जानमाल के नुकसान को रोकने और राजनीतिक समाधान के लिए गुंजाइश बनाने की व्यावहारिक कोशिश है।











