गाय को बेटी की तरह पाला
करीब 18 वर्षों तक परिवार के साथ रहने वाली नंदिनी से घर के सभी सदस्यों का गहरा भावनात्मक रिश्ता था। मंजीत तिहाड़ा ने बताया कि नंदिनी तीन महीने की बछड़ी के रूप में उनके घर आई थी। बाद में उसकी मां की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई, जिसके बाद पूरे परिवार ने उसे बेटी की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया। परिवार के अनुसार, उस समय घर में कोई बेटी नहीं थी, इसलिए नंदिनी से उनका लगाव और अधिक बढ़ गया। घर के बच्चों ने उसके साथ खेलते हुए बचपन बिताया और उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। आज भी उसकी 6 पीढ़ियां परिवार के पास मौजूद हैं।
तेरहवीं में विशेष रूप से 6 क्विंटल रसगुल्ले तैयार करवाए
परिवार ने बताया कि नंदिनी को रसगुल्ले बेहद पसंद थे। इसी वजह से उसकी आत्मिक शांति के लिए आयोजित तेरहवीं में विशेष रूप से 6 क्विंटल रसगुल्ले तैयार करवाए गए। श्रद्धालुओं के लिए आलू और पेठे की सब्जी, पूरी तथा अन्य प्रसाद की व्यवस्था भी की गई। कार्यक्रम की शुरुआत विशेष हवन कुंड में 11 पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ करीब 45 मिनट तक चले हवन-यज्ञ से हुई। इसके बाद गौ-आरती की गई और नंदिनी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। सबसे पहले 21 ब्राह्मणों को प्रसाद वितरित किया गया और फिर हजारों श्रद्धालुओं को पारंपरिक तरीके से जमीन पर बैठाकर भोजन कराया गया।











