रंग लाई सिंधी महिला पंचायत की पहल, डेढ़ साल में दो सौ से अधिक परिवारों को टूटने से बचाया

रंग लाई सिंधी महिला पंचायत की पहल, डेढ़ साल में दो सौ से अधिक परिवारों को टूटने से बचाया
भोपाल। सिंधी समाज के सामाजिक एवं पारिवारिक विवाद हल करने के लिए अनेक संगठन काम कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश संगठनों के पदाधिकारी पुरुष ही हैं। ऐसे में महिलाओं से संबधित मामलों का हल आसानी से नहीं निकल पाता था। अब सिंधी महिला पंचायत ऐसे मामलों का निराकरण करने के लिए आगे आई है। पंचायत ने पिछले डेढ साल में ही दो सौ से अधिक परिवारों को टूटने से बचाया है।

करीब पांच साल पहले संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) में सिंधी महिला पंचायत का गठन हुआ था। डेढ़ साल पहले इसका पंजीयन कर सेवाभावी महिलाओं को जोड़ा गया। पंचायत अध्यक्ष किरण वाधवानी बताती हैं कि वैसे तो पिछले पांच साल हमने कई परिवारों को टूटने से बचाया, लेकिन पंजीयन के बाद इसे गति मिली है। पंचायत का यह प्रयास रहता है कि विवाद की स्थिति में कोई भी मामला सीधे अदालत तक पहुंचने के बजाय आपसी सहमति और स्नेह से सुलझा लिया जाए।

महिलाएं जानती हैं महिलाओं का दर्द

पंचायत अध्यक्ष किरण वाधवानी बताती हैं कि कई बार ऐसा होता था जब विवाह के बाद मामूली कहासुनी बड़े विवाद का कारण बन जाती थी। ऐसे मामलों में मुख्य पंचायत के सामने पुरुष तो अपना पक्ष मजबूती से रख देते थे, लेकिन महिलाएं अपना दर्द साझा नहीं कर पाती थीं। अब महिलाएं हमसे खुलकर बात करती हैं। उनका पक्ष सुनने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाता है।

बनाया संरक्षक मंडल

पंचायत ने हाल ही में नगर के पांच प्रबुद्धजनों को संरक्षक मंडल में भी शामिल किया है ताकि किसी विवाद की स्थिति में केवल महिलाओं का पक्ष सुनकर निर्णय लेने के बजाय पुरुषों का पक्ष सुनने के बाद ही कोई फैसला लिया जाए। पंचायत ने पति द्वारा पत्नी से मारपीट करने, पति द्वारा घर खर्च न देने एवं पड़ोसियों के बीच झगड़े होने के मामले सहमति से सुलझाए हैं। हालांकि पंचायत दोनों पक्षों को यह साफ बताती है किहमारा निर्णय मानने के लिए कोई भी कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। वाधवानी बताती हैं किअधिकांश मामलों में मामूली गलतफहमी के कारण ही परिवार टूटने की कगार पर आ जाते हैं। हम उन्हें जोड़ने का प्रयास करते हैं।
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