उद्योगों को जमीन पर अधूरा हक, दो चुनावों से घोषणा पत्र में सिमटा फ्री होल्ड का वादा

उद्योगों को जमीन पर अधूरा हक, दो चुनावों से घोषणा पत्र में सिमटा फ्री होल्ड का वादा

 इंदौर। चुनावी मौसम में हर वर्ग पर खूब राहतें बरसी लेकिन उद्योगों को राजनीतिक गणित के हिसाब से हाशिये पर ही रखा जा है। दो चुनाव यानी से उद्योगों के हित में की गई सबसे बड़ी घोषणा सिर्फ वचन-पत्र यानी चुनावी घोषणा पत्र तक ही सिमटी है। लगातार दो चुनावों से भाजपा ने उद्योगों की जमीनों को फ्री होल्ड करने का मुद्दा अपने वचन पत्र में रखा था। हालांकि दस वर्षों के लंबे समय में भी इस पर फाइलें तक नहीं चल सकी। उद्योगपति और औद्योगिक संगठन इससे असंतुष्ट है। शायद इसी को भांपकर आचार संहिता लगने से ठीक पहले एक सरकारी चिट्ठी उद्योगों को भेजी गई है।

जमीन पर मालिकाना हक नहीं

प्रदेश में तमाम औद्योगिक क्षेत्र बीते दशकों में सरकार ने बसाए हैं। 40-50 साल तक पुराने इन औद्योगिक क्षेत्र में चल रहे उद्योगों को अब तक उनकी जमीन पर मालिकाना हक नहीं मिल रहा है। दरअसल ये उद्योग संचालक असल में जमीन पर सरकार के लीज धारक ही माने जा रहे हैं। ऐसे में हर निर्णय सरकारी विभागों और बाबूओं की दया पर होता है। और तो और मालिकाना हक नहीं मिलने से उद्योगों पर दोहरे टैक्स की मार भी पड़ रही है।

तो 5 हजार उद्योगों को मिलता लाभ

एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज मप्र के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद डफरिया कहते हैं दो बार से घोषणा पत्र में हमनें पढ़ा कि उद्योगों की जमीन फ्री होल्ड की जाएगी। दोनों सरकारों का कार्यकाल खत्म हो गया एक कदम आगे नहीं बढ़ाया गया। जबकि उद्योग जो 40-50 वर्षों से चल रहे हैं अब तक शासन को करोड़ों लीज शुल्क, टैक्स और जीएसटी से लेकर तमाम करों का राजस्व दे चुके हैं। समझ नहीं आता कौन सा कारण है कि सरकार उद्योगों को मुक्त नहीं रखना चाहती। घोषणा पर अमल होता तो मोटे तौर क्षेत्र में ही पांच हजार उद्योगों को लाभ मिलता।

आचार संहिता से पहले भेजी चिट्ठी

संघ से जुड़े औद्योगिक संगठन लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष महेश गुप्ता के अनुसार सही है दो घोषणा पत्रों में भाजपा ने इस मुद्दे को शामिल किया था। अमल के नाम पर इतना हुआ है कि बीते दिनों जब आचार संहिता लागू होने के चार-पांच दिन पहले एक सरकारी चिट्ठी संगठन के पास पहुंची है। उद्योग विभाग ने हमसे पूछा है कि फ्री होल्ड होने पर उद्योगों को किस तरह लाभ होगा यह बताए। आचार संहिता लग चुकी है स्पष्ट है कि इस पर अमल अब भी नहीं होना है। ना ही हमारे जवाब पर कोई निर्णय होगा।

ये होंगे लाभ

उद्योग संगठनों के अनुसार उद्योगों की जमीन फ्री होल्ड होने से उद्योगों के लिए आसान होगा कि वे अपने उद्योग को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को ट्रांसफर कर सके। कई उद्योग जो अब संचालित नहीं हो पा रहे हैं कोई दूसरा उसे चलाना चाहता है वो भी लीज ट्रांसफर नहीं होने की परेशानी के कारण उद्योग नहीं चला पाता। साथ ही साथ दोहरा टैक्स व अन्य तमाम सरकारी प्रक्रिया की दुश्वारियों का सामना उद्योगों को करना पड़ रहा है।

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