इंदौर-इच्छापुर और अमरावती हाईवे बने मध्य प्रदेश के नए ‘डेथ-स्पॉट’, 8 माह में 250 से ज्यादा एक्सीडेंट, 58 की मौत, 336 घायल

इंदौर-इच्छापुर और अमरावती हाईवे बने मध्य प्रदेश के नए ‘डेथ-स्पॉट’, 8 माह में 250 से ज्यादा एक्सीडेंट, 58 की मौत, 336 घायल

बुरहानपुर। यूं तो मध्य प्रदेश की सड़कों पर कई ‘डेथ-स्पॉट’ हैं, जहां अक्सर बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती हैं, किंतु बुरहानपुर जिले में दो नए डेथ-स्पॉट सामने आए हैं। ये हैं इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाईवे और अमरावती स्टेट हाईवे। ये दोनों बुरहानपुर जिले में जहां-जहां से गुजरे हैं, वहां लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं।आठ माह में ही जिले में 262 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 58 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और 330 लोग घायल हुए हैं। इनमें सर्वाधिक 184 सड़क दुर्घटनाएं दोनों हाईवे पर हुईं और 48 लोगों ने जान गंवाई, जबकि 246 लोग घायल हुए हैं।


सर्पाकार सड़क और हाईवे से सटे गांव दुर्घटनाओं का कारण


  • इंदौर-इच्छापुर हाईवे की अधिकांश सड़क सर्पाकार होने से तेज रफ्तार वाहन अक्सर दुर्घटना का शिकार होते हैं। सड़क के ऊंचे-नीचे साइड शोल्डर और गड्ढे भी प्रमुख कारण हैं।
  • अमरावती स्टेट हाईवे और कुछ जगह इंदौर-इच्छापुर हाईवे से सट कर बसे गांव भी दुर्घटनाओं की वजह बनते हैं। गांवों के आसपास स्पीड ब्रेकर नहीं होने से दुर्घटना होती है।

इसलिए एनएचएआइ नहीं करा रहा काम


कलेक्टर भव्या मित्तल के अनुसार, ‘इंदौर-इच्छापुर हाईवे को फोरलेन सीसी बनाया जा रहा है। असीरगढ़ के आगे तक सड़क निर्माण का अधिकांश काम हो चुका है। वहां से झिरी तक और झिरी से महाराष्ट्र सीमा के इच्छापुर तक बाईपास बनाने का काम शुरू हो रहा है।’

‘इसके चलते नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने असीरगढ़ से इच्छापुर तक के करीब 40 किमी मार्ग का रखरखाव भी बंद कर दिया है।’


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