भोपाल। भारतीय साहित्य एवं कला परिषद भोपाल के तत्वावधान में आयोजित वार्षिक काव्य गोष्ठी में मालवा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से पधारे कवियों ने मनभावन रचनाओं का पाठ किया। अरेरा कालोनी में संजय कुमार सरस की अध्यक्षता, गोकुल सोनी के मुख्य आतिथ्य, सुरेश पटवा के सारस्वत आतिथ्य में संपन्न हुई गोष्ठी में सर्वप्रथम सुषमा श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना का गायन किया। सात घंटे चली गोष्ठी में करीब 50 कवियों ने रचनापाठ किया।
ईश्वर की कृति हैं आंखें
संजय कुमार सरस ने “तुमसे बिछुड़ का तुम्हारी मूरत बना लूंगा”, गोकुल सोनी ने वर्तमान परिवेश पर पढ़ा “उजालों के अंधेरों से अब परस्पर, हो गए अनुबंध कैसा समय आया", सुरेश पटवा ने “शरद पूनम का चांद पूरी चमक-दमक से, कहीं सागर कहीं गागर कहीं शजर में रहता है", डा रामवल्लभ आचार्य ने “मन में इतनी उलझन जितने सघन सतपुड़ा वाले वन”, विवेक रंजन श्रीवास्तव ने “शब्द तुम्हारे कुछ लेकर घर लौटे तो अच्छा हो”, सुषमा श्रीवास्तव ने “ईश्वर की कृति हैं आंखें” रचना सुनाई। इसी प्रकार पुरुषोत्तम तिवारी ने “कब तक झूठे आश्वासन से मन को बहलाएं”, प्रदीप मणि तिवारी ध्रुव ने “रहना सुकून से अगर हसरत को मार दे”, महेश चंद सोनी ने “आशु कविता”, डा मोहन तिवारी आनंद ने “इज्जत बिकी सम्मान बिका मान बिका इतना हुआ मज़बूर कि इंसान बिका”, डा राजेश तिवारी ने “पत्थर तोड़ते तोड़ते खुद भी पत्थर हो गए हैं” कविता का पाठ किया।
इन्होंने भी किया रचनापाठ- आदित्य हरि गुप्ता, तेज सिंह ठाकुर, गोपेश बाजपेयी, मनोज गुप्ता, संजय सक्सेना, अशोक व्यास, कमल कुमार दुबे,गौरीशंकर शर्मा गौरीश, अभिषेक जैन अबोध, सुधा दुबे, महेश अग्रवाल, संजय सिंह, सरोज लता,विमल भंडारी, मनोरमा चौपड़ा आदि ने रचना पाठ किया।बिहारीलाल सोनी ने संस्था का परिचय देकर आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया। संचालन विमल भंडारी ने किया और आभार प्रदर्शन मितेश सोनी ने किया।











