भारतीय सेना को हाई एल्टीट्यूड में मिली फायरिंग रेंज, जानें कैसे दिख रहा असर

भारतीय सेना को हाई एल्टीट्यूड में मिली फायरिंग रेंज, जानें कैसे दिख रहा असर
नई दिल्ली : भारतीय सेना को हाई एल्टीट्यूट एरिया में मिली फायरिंग रेंज के बाद ट्रेनिंग और बेहतर हुई है। पिछले साल ही सेना को अरुणाचल प्रदेश में दो फायरिंग रेंज उपलब्ध कराई गई जो लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से करीब 50 किलोमीटर की एयर डिस्टेंस पर हैं। ये फायरिंग रेंज सेना के लिए ऑक्सिजन की तरह हैं क्योंकि पिछले कुछ वक्त में भारतीय सेना की ‘फील्ड फायरिंग रेंज’ लगातार घटती गई हैं।

फायरिंग रेंज के लिए जमीन मिलना चुनौती


भारतीय सेना में डीजी (डायरेक्टर जनरल) आर्टिलरी लेफ्टिनेंट जनरल अदोष कुमार ने कहा कि अर्बनाइजेशन बढ़ने के साथ फायरिंग रेंज के लिए जमीन मिलने की चुनौती बढ़ी है क्योंकि एरिया कम हुआ है। लेकिन हमने नई फायरिंग रेंज खोली हैं। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में जो फायरिंग रेंज मिली वह हाई एल्टीट्यूट में हैं और इससे पहले नॉर्दन बॉर्डर (चीन बॉर्डर) पर हमारे पास कोई हाई एल्टीट्यूट रेंज नहीं थी। वहां अब हम हाईएल्टीटयूट पर भी फायरिंग ट्रेनिंग कर सकते हैं, जो एक्चुअल ऑपरेशनल जैसा एनवायरमेंट है।

बढ़ जाएगी तोप की रेंज


उन्होंने कहा कि प्लेन्स और हाईएल्टीट्यूट में फायरिंग में बहुत फर्क आ जाता है और हाईएल्टीट्यूट में गन्स (तोप) की रेंज बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि हाई एल्टीट्यूट में फायरिंग रेंज मिलने से ट्रेनिंग में और सुधार हुआ है। लेफ्टिनेंट जनरल कुमार ने कहा कि हम और फायरिंग रेंज की पहचान कर रहे हैं। एक – दो नई रेंज के लिए राज्य सरकारों के साथ नोटिफाई करने को लेकर बात चल रही है।

करीब 40% कम हुई फायरिंग रेंज


सूत्रों के मुताबिक करीब डेढ़ दशक में भारतीय सेना की फील्ड फायरिंग रेंज करीब 40 पर्सेंट कम हो गई हैं। अभी सेना के पास जो फील्ड फायरिंग रेंज हैं वह दो तरह की हैं- फौज की ही जमीन पर जो फायरिंग रेंज के लिए एक्वायर की हैं और दूसरी तरह की फायरिंग रेंज, जिन्हें वक्त वक्त पर राज्य सरकारें फायरिंग रेंज के तौर पर नोटिफाई करती हैं। पिछले कुछ सालों में कई राज्य सरकारों ने फायरिंग रेंज को नोटिफाई नहीं किया है। हर सैनिक को साल में कम से एक बार पूरी ट्रेनिंग करनी होती है। फील्ड फायरिंग रेंज कम होने से अलग अलग यूनिट को ट्रेनिंग का कम वक्त मिल पा रहा है।

पिनाका की रेंज बढ़ाने पर काम


भारतीय सेना के पास जो पिनाका रॉकेट सिस्टम हैं उसकी रेंज बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। डीजी आर्टिलरी लेफ्टिनेंट जनरल अदोष कुमार ने कहा पिनाका सिस्टम भारत के आत्मनिर्भरता की सफलता की कहानी है। उन्होंने कहा कि हम पिनाका रॉकेट की रेंज ज्यादा चाहते हैं और डीआरडीओ इस पर काम कर रहा है। पहले इसकी रेंज डबल होगी और फिर चार गुना तक। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ इसे लेकर काफी आशान्वित है कि वे इसे अचीव कर लेंगे। पिनाका कई तरह के एम्युनिशन फायर कर सकता है।

पिनाका रॉकेट का ट्रायल


पिनाका के लिए गाइडेड एक्सटेंडेड रेंज वाले रॉकेट का ट्रायल भी चल रहा है। हाई एल्टीट्यूट में इसका ट्रायल हो गया है जो सफल रहा। अगले महीने प्लेन्स में इसका ट्रायल होगा। लेफ्टिनेंट जनरल अदोष कुमार ने कहा कि हमें उम्मीद है कि ट्रायल सफल होने के बाद इनका कॉन्ट्रैक्ट भी जल्दी हो जाएगा। एक्सटेंडेड रेंज मौजूदा रेंज से डबल होगी। उन्होंने कहा कि हम एरिया डिनायल एम्युनिशन सिस्टम भी देख रहे हैं, इसे लेकर बातचीत चल रही है और इस वित्त वर्ष में कॉन्ट्रैक्ट साइन होने की उम्मीद है।
Advertisement