ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 180 देशों की करप्शन की रिपोर्ट मंगलवार (30 जनवरी) को जारी की गई। इसके मुताबिक भारत में 2023 में भ्रष्टाचार बढ़ा है। रिपोर्ट के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में भारत 2023 में 93वें स्थान पर आ गया है, जबकि एक साल पहले 2022 में भारत 85वें स्थान पर था। इस रैंकिंग में 1 नंबर पर रहने वाले देश में कम भ्रष्टाचार है और 180वे नंबर पर रहने वाले देश में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन 76वें और पाकिस्तान 133वें नंबर पर है। वहीं, डेनमार्क (1) में सबसे कम भ्रष्टाचार है जबकि सोमालिया (180) सबसे करप्ट देश है।
इस इंडेक्स के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के एक्सपर्ट्स हर देश के पब्लिक सेक्टर में भ्रष्टाचार का आकलन करते हैं। इसके बाद हर देश को 0 से 100 के बीच स्कोर दिया जाता है। जिस देश में जितना ज्यादा भ्रष्टाचार, उसे उतना कम स्कोर दिया जाता है। इसी आधार पर इंडेक्स में रैंकिंग निर्धारित होती है।
आज जारी की गई 2023 की रिपोर्ट में भारत का स्कोर 39 निर्धारित किया गया है। 2022 में यह स्कोर 40 था। सिर्फ एक नंबर के कम होने से भारत 8 पायदान खिसक गया है।
PM मोदी के कार्यकाल में कम नहीं हुआ करप्शन
2005 से लेकर 2013 तक UPA की सरकार और मौजूदा NDA सरकार की तुलना की जाए तो स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। 2006-07 में करप्शन के मामले में जरूर रैंकिंग सुधरी। उस दौरान भारत 70वें और 72वें स्थान पर था।
UPA शासन के अंतिम समय में यानी 2013 में भारत 94वें स्थान पर लुढ़क गया। वहीं NDA के कार्यकाल में सबसे अच्छी स्थिति 2015 में रही, तब भारत वर्ल्ड रैंकिंग में 76वें स्थान पर पहुंचा था।
4 पॉइंट्स में समझिए, एशिया के देशों में भ्रष्टाचार की स्थिति
एशिया के देशों में पिछले 5 सालों में CPI स्कोर 45 के आसपास बना हुआ है। बहुत कम देशों में ही भ्रष्टाचार में कमी आई है। एशिया के अधिकतर देशों में धीरे-धीरे भ्रष्टाचार बढ़ा है।
भारत समेत एशिया के 71 देशों का स्कोर यहां के औसत स्कोर (45) से नीचे है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन देशों के नेताओं ने भ्रष्टाचार के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया है। साथ ही इन देशों में स्वतंत्र प्रेस पर भी हमले हुए हैं। इससे भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने पिछले दशक में भ्रष्टाचार में लिप्त 3.7 मिलियन सरकारी अधिकारियों को सजा सुनाई थी। इसकी चर्चा दुनियाभर में हुई थी, लेकिन चीन ने अपने संस्थानों में भ्रष्टाचार कम करने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए। इससे उसकी नीतियों पर संदेह पैदा होता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान और श्रीलंका में कर्ज का बोझ और राजनीतिक अस्थिरिता है। हालांकि इन देशों में न्यायपालिका के मजबूत होने के कारण भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक लगाम लगी हुई है। वहीं, बांग्लादेश (149) लीस्ट डेवलप्ड देशों (LDC) के स्टेटस से उभर कर सामने आया है। यहां आर्थिक विकास हुआ है और गरीबी में कमी आई है।











