भारत नेपाल के साथ 'बड़े भाई' के तौर पर नहीं बल्कि एक 'सच्चे दोस्त' की तरह संबंध बना रहा है और जो तीन कदम महत्वपूर्ण तौर पर उठाए गये हैं वो हैं, 1- सेना, 2- स्टार्ट अप और 3- UPI। नेपाल के साथ भारत का जुड़ाव धीरे-धीरे कभी-कभार दी जाने वाली मदद और सिर्फ बातों तक सीमित रहने के बजाय मानवीय, विकास और संस्थागत स्तर पर एक मजबूत साझेदारी में बदल रहा है।
नेपाल में भारत की 'सेना' वाली डिप्लोमेसी क्या है?
चीन और अमेरिका के प्रभाव बनाने वाली कोशिशों के बीच भारतीय सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ की इस महीने की नेपाल यात्रा ने यह दिखाया कि भारत-नेपाल के रक्षा संबंध समाज में कितनी गहराई से जुड़े हैं। नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल से नेपाली सेना में जनरल का मानद पद पाना, टुंडिखेल में श्रद्धांजलि देना, शिवपुरी में स्टूडेंट ऑफिसर्स को संबोधित करना और पोखरा में पूर्व सैनिकों की रैली की अध्यक्षता करना जिसमें 'वीर नारियों' या युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की पत्नियों को सम्मानित किया गया। इन सभी कार्यक्रमों ने भारत-नेपाल सुरक्षा सहयोग के लिए एक ऐसा सामाजिक आधार तैयार किया जिसे सिर्फ डेलिगेशन की यात्राओं या सोच-समझकर किए गए फोटो सेशन से नहीं बनाया जा सकता।नेपाल के विकास के लिए स्टार्ट-अप के जरिए मदद
भारत-नेपाल स्टार्टअप कहानी दोनों देशों के रिश्तों का एक ऐसा पहलू रही है जिस पर बहुत कम ध्यान दिया गया है, लेकिन रणनीतिक तौर पर यह बहुत अहम है। 'इंडिया-नेपाल स्टार्टअप पार्टनरशिप नेटवर्क' (IN-SPAN) ने नेपाल के युवा उद्यमियों को सीधे IIT मद्रास जैसे भारत के टॉप-लेवल टेक इनक्यूबेटर्स से जोड़ा है। इससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच का रिश्ता पारंपरिक मदद से आगे बढ़कर 'को-इनोवेशन' में बदल रहा है।IN-SPAN को एक आत्मनिर्भर इकोसिस्टम के तौर पर डिजाइन किया गया है। इसके दो ग्रुप्स ने अब तक लगभग 50 नेपाली स्टार्टअप्स की मदद की है। ये स्टार्टअप्स साइबर सिक्योरिटी और एड-टेक से लेकर क्लीन-टेक, एग्रो-टेक और क्लाइमेट-टेक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इस पहल से नेपाल के युवाओं को अपनी कंपनियाँ बनाने और भारत के विशाल बाज़ार व टैलेंट पूल से जुड़ने के साधन मिल रहे हैं।
