गजब! वैभव सूर्यवंशी के बैट में तो नहीं, लेकिन इस गेंद में जरूर 500Hz की चिप लगी है, मोशन का मिलेगा लाइव अपडेट

गजब! वैभव सूर्यवंशी के बैट में तो नहीं, लेकिन इस गेंद में जरूर 500Hz की चिप लगी है, मोशन का मिलेगा लाइव अपडेट
नई दिल्ली: आईपीएल में जब वैभव सूर्यवंशी ने रनों की बरसात की तो पाकिस्तान से कहा गया कि उनके बल्ले में चिप है। उनके बल्ले में कोई चिप नहीं है लेकिन इस साल होने वाले फीफा विश्व कप के ऑफिशियल मैच बॉल में जरूर चिप का इस्तेमाल किया गया है। हर फीफा विश्व कप के लिए स्पेशल गेंद बनाई जाती है। गेंद में मैन्युफैक्चरर हर बार कुछ अलग करने की कोशिश करते हैं। इस बार गेंद में एडवांस टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया है। 11 जून से अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में टूर्नामेंट की शुरुआत हो रही है। एडिडास 1970 से ही फीफा विश्व कप के लिए गेंद बना रही है। इस साल होने वाले विश्व कप की गेंद को लॉन्च किया जा चुका है। फीफा विश्व कप 2026 की गेंद को ट्रायोंडा नाम दिया गया। ट्राई यानी तीन और ओंडा यानी लहर को जोड़ने वाला। यह टूर्नामेंट के तीनों मेजबान देश के प्रतीक है।

फीफा विश्व कप की बॉल में क्या खास है?

फीफा विश्व कप की ऑफिशियल मैच बॉल पर लाल, हरे और नीले रंग का आकर्षक डिजाइन बनाया गया है। इसके साथ ही इसपर तीनों मेजबान देशों के खास सिम्बल को भी शामिल किया गया है। अमेरिका के लिए स्टार, कनाडा के लिए मेपल लीफ तो मेक्सिको के लिए ईगल। गेंद पर सुनहरे रंग की डिटेलिंग भी दी गई है, जो विश्व कप ट्रॉफी को सम्मान देने के लिए जोड़ी गई है। इस गेंद को डिजाइन करने में साढ़े तीन साल से ज्यादा का समय लगा है।

बॉल में इस बार चिप भी लगी है

फीफा विश्व कप 2026 में इस्तेमाल होने वाली गेंद में खास कनेक्टेड बॉल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है। गेंद में 500Hz इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट मोशन सेंसर चिप लगाई गई है। इसके गेंद को अंदर खास लेयर बनाकर फिट किया गया है। इससे रियल टाइम में डेटा VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) सिस्टम तक पहुंचेगी, जिससे रेफरी ऑफसाइड, हैंडबॉल और खिलाड़ी के टच जैसे फैसले तेजी और अधिक सटीकता से ले सकते हैं।

गेंद को हर परिस्थिति में टेस्ट किया गया

इस गेंद को अलग-अलग मौसम, ऊंचाई और सात मेजबान शहरों में टेस्ट किया गया। इसके साथ ही रोबोट की मदद से गेंद को 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मारकर इसकी मजबूती और सटीकता जांची गई है। खिलाड़ियों पर ब्लाइंड टेस्ट भी किए गए। इससे यह चेक किया गया कि चिप लगने के बाद खिलाड़ी को कुछ अलग अनुभव तो नहीं लग रहा है।
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