हालत यह कि 6 वर्ष में पहला ही चरण पूरा नहीं हुआ। 30 हजार में से सिर्फ 24 हजार मीटर लगे, उनमें भी बिलिंग का काम शुरू नहीं हो सका। निगम को पूरे शहर में तीन लाख से ज्यादा मीटर लगाना है। पहले चरण में काम की गति देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि निगम मीटर लगाने का काम किस तीव्र गति से कर रहा है।
पानी के दुरुपयोग को रोकना है मंशा
हर जल कनेक्शन के साथ मीटर लगाने का उद्देश्य पानी के दुरुपयोग को रोकना और पेयजल की हर बूंद का हिसाब रखना था लेकिन निगम इसमें असफल रहा। नगर निगम प्रति मीटर 2500 रुपये वसूल रहा है। निगम मीटर तो लगा रहा है लेकिन बिलिंग शुरू नहीं हुई है। छह वर्ष पहले लगाए गए ज्यादातर मीटर खराब होने लगे हैं। ऐसे में यह भी स्पष्ट नहीं है कि बिलिंग शुरू करने से पहले क्या निगम इन खराब हो चुके मीटर को बदलेगा।
निगम को पता नहीं कहां और कितनी हो रही खपत
चौंकाने वाली बात यह है कि पानी की हर बूंद सहेजने का दावा करने वाले नगर निगम के अधिकारियों को यह तक पता नहीं है कि पानी की कहां और कितनी खपत हो रही है। कार्यपालन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि आंकलन करना बाकी है। इधर जलकार्य समिति प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू भी अमृत-2 योजना में पूरे शहर में मीटर लगाए जाने पर विचार करने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस बात की गणना करवाई जा रही है कि आखिर शहर में पानी की कितनी खपत है।











