बड़वानी में प्राचार्य के प्रयास से फिर हुई 'शून्य की खोज', 12वीं के ऐसे परिणाम पर कमिश्नर ने कर दिया सस्पेंड

बड़वानी में प्राचार्य के प्रयास से फिर हुई 'शून्य की खोज', 12वीं के ऐसे परिणाम पर कमिश्नर ने कर दिया सस्पेंड
बड़वानी: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के मलफा में एक स्कूल के 12वीं कक्षा के सभी बच्चे फेल हो गए। शून्य परिणाम की ऐसी घटना के 5 महीने बाद स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है। स्कूल की लापरवाही और बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान न देने को इसका जिम्मेदार ठहराया गया है।

दरअसल, बड़वानी जिले के पानसेमल विकासखंड में स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मलफा में 12वीं कक्षा के 89 में से 85 बच्चों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 81 बच्चे सीधे फेल हो गए और 4 को पूरक आई है। इसका मतलब एक भी बच्चा पास नहीं हुआ है।

कमिश्नर का सख्त एक्शन


इसके बाद इंदौर कमिश्नर दीपक सिंह ने कलेक्टर की अनुशंसा पर स्कूल के प्रिंसिपल आलोक सिसोदिया को निलंबित कर दिया है।

जिला कलेक्टर का कमिश्नर को पत्र


जिला कलेक्टर ने कमिश्नर को लिखे पत्र में बताया कि प्राचार्य द्वारा विद्यालय में अध्यनरत विद्यार्थियों के शैक्षणिक विस्तार में सुधार हेतु कोई प्रयास नहीं किया गया। संस्था में पदस्थ शिक्षकों से समुचित कार्य नहीं लिया गया। साथ ही दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके अलावा प्रभारी प्राचार्य के दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही व उदासीनता बरती गई। जिसके परिणाम स्वरुप इनके विद्यालय का कक्षा 12वीं का परिणाम शून्य रहा है।

इसी विकासखंड से शून्य परिणाम का एक और मामला


यह मामला तब और भी चौंकाने वाला हो जाता है जब पता चलता है कि इसी विकासखंड के पिपरानी गांव के हाई स्कूल में भी 10वीं के सभी 41 बच्चे फेल हो गए थे। इसके अलावा कई और स्कूलों का रिजल्ट भी सिर्फ 2 से 5 फीसदी ही रहा है। इस घटना ने आदिवासी जिलों में शिक्षा के स्तर पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

अभिभावकों का कहना


इस मामले में अभिभावकों का कहना है कि जब नकल कराई जाती है तब बच्चे पास हो जाते हैं। और जब सही मॉनिटरिंग की जाती है तो फेल हो जाते हैं। उनका आरोप है कि अगर साल भर सही से पढ़ाई कराई जाए और शिक्षकों पर नजर रखी जाए, तो ऐसी शर्मनाक स्थिति कभी नहीं आएगी।
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