भोपाल। मध्य प्रदेश 'बीमारू' से निकलकर विकासशील राज्य की श्रेणी में आ गया है। अब औद्योगिक समूहों का विश्वास जीतना होगा। इसके लिए राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम, बिना अनुमति उद्योग की स्थापना सहित जो वादे उद्योग जगत से किए हैं, उन्हें धरती पर उतारना होगा। उद्योग हितैषी माहौल बनाना पड़ेगा। उद्योगों की स्थापना से जुड़े विभागों के अधिकारियों की कार्य संस्कृति में सुधार लाना पड़ेगा। ऐसा हुआ तो मध्य प्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां सर्वाधिक निवेश होता है।
राज्य सरकार को यह भी विचार करना चाहिए कि जो बड़े उद्योग या कारखाने थे, वे बंद या सिकुड़ क्यों रहे हैं। इनकी भूमि पर भी नए सिरे से बड़े उद्योगों को आमंत्रण देना चाहिए। भोपाल का भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड, नेपानगर अखबारी कागज कारखाना, आप्टिकल फाइबर का उत्पादन करने वाले आप्टेल जैसी संस्थाओं में भागीदारी बढ़ाना चाहिए। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था को गति भी मिलेगी।
औद्योगिक भूमि प्रबंधन में किए सुधार
उद्योगों की समस्याओं के निराकरण के लिए उद्योग मित्र योजना 2004 लागू की गई है। लैंड बैंक बनाया गया। उद्योगों को रियायती दर पर भूमि उपलब्ध कराने का प्रविधान है। भूमि आवंटन प्रक्रिया को आनलाइन किया गया है। 25 औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग इकाइयों को किस्तों में राशि जमा करने की सुविधा दी तो ई-बिडिंग प्रक्रिया को भी शामिल किया गया।
बीमार, बंद इकाइयों के पुनर्वास के लिए नियम किए सरल
प्रदेश में बीमार या बंद हो चुकी इकाइयों के पुनर्वास के लिए नियमों को सरल बनाकर उनके संवर्धन के लिए विशेष पैकेज देने का प्रविधान किया गया है। विभागीय सुविधाओं/ अनुमति के लिए एकल आवेदन और स्व-प्रमाणीकरण प्रणाली लागू की गई। उद्योग संवर्धन नीति 2014 के अंतर्गत सुविधाओं का लाभ लेने वाली इकाइयों को 70 प्रतिशत रोजगार मध्य प्रदेश के स्थायी निवासियों को देने की अनिवार्यता की गई है।
मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसके द्वारा जीएसटी लागू होने पर सफलतापूर्वक टैक्स डी-लिंक इंसेंटिव का प्रविधान किया गया। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए अन्य उद्योगों की तुलना में डेढ़ गुना अधिक निवेश प्रोत्साहन सहायता दी जा रही है। निर्यातक इकाइयों के लिए 1.2 गुना अतिरिक्त निवेश प्रोत्साहन सहायता का प्रविधान रखा है।
प्रदेश में अभी ये प्रमुख औद्योगिक नीतिगत सुधार हुए
नियम और प्रक्रियाओं को सरल कर प्रशासन को उद्योग मित्र बनाना।
उद्योगों में निरीक्षण की संख्या कम करना (इंस्पेक्टर राज को समाप्त करना)।
मप्र इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन एक्ट 2008 के अंतर्गत सिंगल विंडो क्लियरेंस के लिए समितियों का गठन।सिंगल विंडो सिस्टम से विभिन्न विभागों की 46 सेवाओं की अनुमति।
इन्वेस्ट पोर्टल के माध्यम से आनलाइन विभिन्न विभागों की सुविधा/सहायता।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों के लिए 165 सेवाएं।











