इन शब्दों को इस्तेमाल करने की मनाही
CJI ने कहा कि हैंडबुक का उद्देश्य न केवल कानूनी समुदाय बल्कि समाज को भी विकलांगता का जिक्र करते समय समावेशी शब्दावली का उपयोग करने में सहायता और संवेदनशील बनाना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि पुलिस स्टेशनों से लेकर अदालतों तक, न्याय प्रणाली विकलांग बच्चों की भेद्यता को समझे और उस पर उचित प्रतिक्रिया दे।
मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति वाले व्यक्तियों का जिक्र करते समय, जिन शब्दों से बचना चाहिए उनमें पागल, सनकी, मूर्ख, पागल, सनकी, पागल, सनकी केस, बेवकूफ शामिल हैं ।CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने आगे कहा कि न्याय व्यवस्था को दिव्यांग बच्चों की जरूरतों को समझना चाहिए।
इसके अलावा 'विकलांग व्यक्ति' का उपयोग करने के बजाय हैंडबुक 'विकलांगता वाले व्यक्ति' वाक्यांश का उपयोग करने की सिफारिश करता है क्योंकि यह लोगों को पहले दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसमें यह भी बताया गया है कि कुछ शब्द जैसे दृढ़ संकल्प वाले लोग, विशेष और अलग तरह से सक्षम को भी कृपालु और आपत्तिजनक माना जाता है। इसके साथ ही ये भी सिफारिश की गई है कि जब भी संभव हो और संदेह हो, तो संबंधित व्यक्ति से पूछें कि वे खुद को कहलवाना पसंद करेंगे।











