टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में पिछले चार साल में सरकारी बैंकों के कुल डिपॉजिट में करंट अकाउंट और सेविंग्स अकाउंट (CASA) के घटते हिस्से पर भी चर्चा हुई। बैठक के लिए तैयार एक पेपर में कहा गया कि यह फंड का सबसे सस्ता जरिया हैं, इसलिए इनमें कमी आने से ज्यादा लागत वाले डिपॉजिट पर निर्भरता बढ़ती है। इससे फंडिंग की लागत और मार्जिन पर दबाव पड़ता है।
क्या है समस्या?
बैंकरों ने इस बात पर चर्चा की कि सरकारी बैंकों की क्रेडिट कार्ड बिजनेस के ज्यादा वैल्यू वाले सेगमेंट में स्ट्रक्चरल रूप से कम हिस्सेदारी है। ज्यादातर सरकारी बैंक एक स्टैटिक और सबके लिए एक जैसा रिवॉर्ड कैटलॉग ऑफर करते हैं। यह ग्राहकों को सही वैल्यू नहीं समझा पाता है।एक बैंकर ने कहा कि कॉर्पोरेट ट्रैवल और एक्सपेंस कार्ड, HNI मेटल/प्रीमियम कार्ड और MSME बिजनेस कार्ड ऐसे सेगमेंट हैं जहां प्राइवेट और विदेशी बैंकों का दबदबा है। Amex, HDFC, Axis और ICICI के पास 20 से 50 तरह के कार्ड हैं। SBI ने भी सेल्स, अंडरराइटिंग और सर्विसिंग की खास क्षमताएं विकसित की हैं लेकिन ज्यादातर सरकारी बैंकों ने अभी तक बड़े पैमाने पर इसे नहीं अपनाया है।
