भोपाल। सत्र 2023-24 को शुरू हुए छह माह से अधिक समय हो गया, लेकिन अब तक सरकारी स्कूलों के 40 प्रतिशत विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें सहित अन्य पाठ्य सामग्री नहीं मिल पाई हैं। इससे विद्यार्थी पुरानी किताबों से पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। प्रदेश के 60 प्रतिशत विद्यार्थियों तक ही पाठ्य सामग्रियां पहुंच पाई हैं। यह खुलासा राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा ट्रेकिंग एप के माध्यम से जारी किए गए एक आदेश में हुआ है। इसमें यह बात भी सामने आई है कि मप्र पाठ्यपुस्तक निगम ने विकासखंड स्तर पर डीपो में 99 प्रतिशत पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध करा दी है। 82 प्रतिशत स्कूलों तक पाठ्यसामग्री पहुंच गई हैं, लेकिन 60 प्रतिशत विद्यार्थियों को ही वितरित की गई है।
इसी माह के अंत तक पूरा करना होगा कार्य
राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिले के संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि ट्रेकिंग एप के माध्यम से पाठ्यपुस्तकों का 31 अक्टूबर तक शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित किया जाए। निर्देशित किया गया है कि 31 अक्टूबर के बाद शेष पाठ्यपुस्तकों को सत्र 2024-25 के लिए उपलब्ध कराया जाएगा । यदि जिलों में पाठ्यसामग्रियों की संख्या सत्र 2024-25 में कम होती है तो यह जिले की जवाबदेही होगी।
बता दें, कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के अलावा दक्षता उन्नयन, एफएलएन (मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान), प्रयास एवं एटग्रेड की साढ़े आठ करोड़ पाठ्य सामग्री मप्र पाठ्यपुस्तक निगम की ओर से तैयार कर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाती है।
पाठ्यसामग्री वितरण में बड़े शहर भी पीछे
भोपाल जिले में 52 प्रतिशत विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें वितरित की गई है। वहीं ग्वालियर में 60 प्रतिशत, जबलपुर में 59 प्रतिशत, इंदौर में 57 प्रतिशत को ही पाठ्यपुस्तकें मिली हैं। कुछ और जिले भी 55 प्रतिशत से नीचे हैं। इसमें गुना में 46 प्रतिशत, धार व कटनी 50 प्रतिशत, सिंगरौली 51 प्रतिशत,श्योपुर 52 प्रतिशत, सीधी 53 प्रतिशत विद्यार्थियों को पाठ्यसामग्री वितरित की गई हैं।
विद्यार्थियों को मिलने वाली पाठ्यसामग्री
प्रदेश के 77 प्रतिशत विद्यार्थियों को निश्शुल्क पाठ्यपुस्तकें दी गई हैं। वहीं 82 प्रतिशत को प्रयास पुस्तिका, 64 प्रतिशत को दक्षता उन्नयन की किताब,16 प्रतिशत को एटग्रेड की अभ्यास पुस्तिका दी गई है। इसके अलावा 70 प्रतिशत को एफएलएन वितरित किया गया है।
इस बार ट्रेकिंग एप के माध्यम से विद्यार्थियों को निशुल्क वितरित की जा रही पाठ्यपुस्तकों की ट्रेकिंग की गई है।यह नहीं कहा जा सकता है कि इसमें 60 प्रतिशत विद्यार्थियों को ही अब तक पाठ्यसामग्री नहीं मिली है, बल्कि कुछ जिलों ने एप पर अपडेट नहीं किए हैं।इस कारण संख्या कम प्रदर्शित हो रही है।31 अक्टूबर तक अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
- धनराजू एस, संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र
मेरी बेटी तीसरी कक्षा में पढ़ती है। अभी तक कई किताबें नहीं मिली है। इस कारण पुरानी किताब से पढ़ाई कर रही है।
- हेमलता यादव, अभिभावक
अंग्रेजी माध्यम की सामाजिक विज्ञान की किताबें नहीं मिली है। इसके अलावा सभी किताब मिल गई हैं।
- अमित सिंह, विद्यार्थी
अगर पाठ्यपुस्तकें बच्चों को समय से नहीं मिलेगी तो पढ़ाई करना मुश्किल होगा। इससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होगी।
- सुनीता सक्सेना, शिक्षाविद्











