महाराज बाड़ा स्थित देवघर में मनाया जाता है उर्स
दरअसल, हर साल सूफी संत मंसूर शाह का उर्स महाराज बाड़ा स्थित देवघर में मनाया जाता है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया राजघराने की परंपरा को निभाते हुए यहा गोरखी देवघर में पूजा अर्चना की है। करीब एक घंटे तक ज्योतिरादित्य सिंधिया देवघर में रहे हैं। इसके बाद बाबा मंसूर शाह का उन्हें आशीर्वाद मिला है।300 साल से चली आ रही है यह परंपरा
सिंधिया राज घराने में यह परंपरा 300 सालों से चली आ रही है। राज परिवार के मुखिया देवघर में पूजा के लिए जाते हैं। अभी ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर राजघराने के महाराज हैं। इसीलिए वही हर साल पूजा करते हैं। देवघर में मंसूर शाह से जुड़ी स्मृतियां भी रखी हुई हैं।क्यों हैं मंसूर शाह पर अटूट आस्था
इसके पीछे एक पौराणिक कहानी है। कहा जाता है कि सिंधिया राजवंश के संस्थापक महादजी सिंधिया थे। वह पानीपत के युद्ध में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ऐसे में परिवार को सलामती की चिंता सता रही थी। बताया जाता है कि महादजी की पत्नी और मां सूफी संत के दरबार में पहुंची थीं।जीवित लौटने का दिलाया था भरोसा
महादजी की मां और पत्नी को संत मंसूर शाह ने उन्हें जीवित लौटने का भरोसा दिलाया था। कुछ दिन बाद घायल अवस्था में महादजी जीवित लौटे थे। इसके बाद से ही सिंधिया राजपरिवार का मंसूर शाह पर अटूट भरोसा है।पांच पीढ़ियों तक राज करने का भरोसा दिया
इसके साथ ही सूफी संत मंसूर शाह ने महादजी सिंधिया को आधी रोटी दी। साथ ही पांच पीढ़ियों तक राज करने आशीर्वाद दिया। इसके बाद सिंधिया परिवार के लोगों ने आज भी इस आधी रोटी को संभाल कर देवघर में रखा है। हर साल उर्स पर उनकी पूजा की जाती है।गौरतलब है कि इस देवघर में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी स्मृतियां भी हैं। सिंधिया परिवार इन सभी की पूजा करता है। सोमवार की रात पूजा के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि हमने सुख-शांति के लिए आशीर्वाद मांगा है।
