ये सारी बातें बॉलीवुड एक्टर गुलशन देवैया हमसे कह रहे हैं। आज की स्ट्रगल स्टोरी में कहानी इन्हीं की है। 2023 गुलशन के लिए खास रहा है। इस साल रिलीज हुई वेब सीरीज दहाड़ और गन्स एंड गुलाब से उन्हें बहुत पॉपुलैरिटी मिली है। उन्हें फिल्म दम मारो दम, रामलीला, कमांडो 3 और बधाई दो जैसी फिल्मों से भी जाना जाता है। हालांकि, यहां पहुंचने तक का सफर आसान नहीं रहा।
करीब दोपहर 2 बजे, हम जूम लिंक के जरिए मुखातिब हुए। थोड़ी औपचारिकता के बाद हमने बातचीत का सिलसिला शुरू किया।
पेरेंट्स की वजह से एक्टिंग से जुड़ना हुआ
बचपन के दिनों के बारे में गुलशन कहते हैं, ‘मैं मूल रूप से कर्नाटक से हूं, मेरी परवरिश बैंगलोर में हुई है। मम्मी (पुष्पलता) और पापा (श्री देवैया), दोनों भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में काम करते थे। पूरा परिवार कंपनी की तरफ मिले क्वार्टर में रहता था।
एक्टिंग में रुझान पेरेंट्स की वजह से आया। दरअसल, मम्मी-पापा को गानों का बहुत शौक था। वे लोग ज्यादातर 60-70 दशक के गाने सुना करते थे। वे लोग अक्सर म्यूजिक प्रोग्राम और नाटक में भाग लिया करते थे। दोनों मुझे भी ऐसा करने के प्रोत्साहित करते रहते थे।
मेरी पढ़ाई कॉन्वेंट स्कूल से हुई है। पेरेंट्स की इस कला से स्कूल वाले वाकिफ थे। वे लोग भी मुझे स्कूल फंक्शन में प्लेज करने के लिए मोटिवेट करते थे। उनकी बात मान मैं भी स्कूल के एनुअल फंक्शन में संगीत और नाटक में पार्टिसिपेट करने लगा। डांस भी करता था, लेकिन इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। शायद इसी दौरान मैं फिल्मों से जुड़ता चला गया।’
जब गुलशन यह सारी बातें कह रहे थे, तो उनकी आंखों में एक अलग सी चमक थी। लग रहा था कि कहते-कहते वे उसी दौर को फिर जीने लगे हों। वे कहानी में आगे बढ़ ही रहे थे, तभी मैंने उन्हें रोक दिया और NIFT के बारे में सवाल किया।
12वीं में फेल भी हुआ, मेहनत कर आगे बढ़ा
वे कहते हैं, ‘मैं पढ़ाई में बहुत अच्छा नहीं रहा हूं। एवरेज स्टूडेंट था। एक बार 12वीं में फेल हो गया था, दोबारा एग्जाम देकर पास हुआ। वक्त के साथ मैं फिल्मों के प्रति बहुत जुनूनी हो गया था, मगर कभी यह नहीं सोचा था कि एक्टिंग को ही प्रोफेशन बनाऊंगा। हालांकि, 1995 के बाद मैं फिल्मों और नाटक को बहुत ध्यान से देखने और समझने लगा था।
1997 में NIFT का एंट्रेंस एग्जाम दिया। किस्मत से इसमें सिलेक्शन हो गया। इस सफलता से मैं बहुत खुश था, क्योंकि आसानी से किसी का यहां एडमिशन नहीं होता। फिर 3 साल यहां पढ़ाई करने के बाद 2000 में पास आउट हो गया।’
मोटापे की वजह से नाटक में सिलेक्शन नहीं हुआ
फिर वे बताते हैं, 'NIFT से पास आउट हो जाने के बाद मैंने विगन एंड लेह कॉलेज में बच्चों को पढ़ाया था। पहले यहां पर फुल टाइम जॉब करता था, कुछ टाइम बाद पार्ट टाइम की नौकरी करने लगा। दरअसल, वक्त के साथ इस काम से बोर हो गया था।
कुछ टाइम बाद लगा कि सब थम सा गया हो। कुछ समय में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। सेहत पर भी बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा था। क्या खाता था, क्या पीता था, किसी चीज की सुध नहीं थी। खूब मोटा हो गया था। इसी दौरान एक नाटक के लिए ऑडिशन दिया, सबको काम पसंद आया, लेकिन सिलेक्शन के वक्त मोटे शरीर की वजह से NOT FIT का डायलॉग मुंह पर चिपका दिया गया।
इस बात को कुछ ही दिन बीते थे, मां ने कहा- तेरा पेट झूलता चला जा रहा है, कुछ कर।
मां की यह बात सुनते ही फैसला कर लिया कि खुद को पहले जैसे बेहतर बनाऊंगा। यह बात 2007 की है।
मैंने 2008 तक खुद पर बहुत मेहनत की और पहले जैसा बनाया। इसके बाद 2008 में सपनों की नगरी मुंबई आना हुआ।'
नाटक में सिलेक्शन नहीं हुआ तो पूरी रात फूट फूट कर रोया
'मुंबई आने के बाद मैं रजत कपूर के नाटक ग्रुप से जुड़ा। रजत सर अपने नाटक के लिए फाइनल ग्रुप बना रहे थे, जिसमें 6-7 लड़के चाहिए थे। उस ग्रुप का सातवां लड़का मैं था, जिसे उन्होंने यह कहते हुए रिजेक्ट कर दिया कि मैं शायद उस ग्रुप का हिस्सा बनने के लायक नहीं हूं।
उनकी यह बात सुनकर बहुत बुरा लगा। रजत सर के सामने मैंने यह बात नहीं जताई, लेकिन घर जाकर फूट-फूट कर रोया। साथ में रहने वाले दोस्त को ना पता चले, इसलिए चादर से मुंह छिपाकर रोया था।
इस नाटक ग्रुप का हिस्सा बनने की मेरी दिली चाहत थी, लेकिन ऐसा ना होने का कसूरवार भी मैं खुद को ही मानता रहा था। नाटक में सिलेक्ट नहीं हो पाया, क्योंकि मुझमें आत्मविश्वास की कमी थी। यह कमी भी इसलिए आई क्योंकि इस ग्रुप में नया था। नाटक की गहराइयों को अभी सीखना बाकी था। दूसरे साथी इसमें निपुण थे। वे एक-दूसरे को जानते थे। मगर, मैं इन सब में नया और अकेला था। रोज प्रैक्टिस पर जाता था, लेकिन मुझे पता था कि अभी मंजिल बहुत दूर है।
हालांकि, मैं अगले दिन गया और रजत सर से मिला। मैंने उनसे कहा- सर कोई भी काम दे दीजिए, पर मुझे इस नाटक ग्रुप का हिस्सा बनना है। उन्होंने सवाल किया- क्या तुम्हें लाइटिंग करनी आती है। मैंने ना जवाब में दिया, पर उन्हें आश्वासन दिया कि यह काम सीख जाऊंगा। मैंने एक घंटे में तुरंत लाइटिंग सीख ली। फिर मैं शोज के दौरान लाइटिंग करने लगा। कभी-कभी कोई साथी कलाकार के ना होने पर छोटा रोल भी करने का मौका मिल जाता था। उस ग्रुप के साथ मैंने लगभग 20 शोज किए। फिर कुछ समय बाद यह ग्रुप छोड़ दिया।'
15 मिनट की मुलाकात के बाद मिली फिल्म रामलीला
गुलशन ने अनुराग कश्यप की फिल्म दैट गर्ल इन यलो बूट्स में काम किया था। विकिपीडिया के मुताबित, यह उनकी डेब्यू फिल्म है। गुलशन इस बात से काफी हद तक सहमत हैं। इसके बाद उन्हें फिल्म दम मारो दम मिली।
इस फिल्म के दो साल बाद वे फिल्म गोलियों की रासलीला रामलीला में दिखे। इस फिल्म के बारे में वे कहते हैं, ‘इस फिल्म में काम करके बहुत मजा आया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि संजय लीला भंसाली की फिल्म में काम करूंगा। उनकी फिल्म में काम मिलना किसी सरप्राइज से कम नहीं था।
संजय सर की टीम से किसी ने मेरे नाम का सुझाव भवानी के रोल के लिए दिया था। फिर यह बात मेरी मैनेजर तक पहुंची। इसके बाद संजय सर के साथ मेरी मुलाकात हुई। मुलाकात के दौरान मैंने कहा- सर आपकी फिल्म सांवरिया मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है।
फिर उन्होंने 2-3 पगड़ियां मुझे पहनाईं और कहा- तुम कमल हसन की तरह दिखते हो। उनके कहने के बाद मुझे भी यह बात महसूस हुई। इतने महान कलाकार से खुद की तुलना सुन बहुत खुश हुआ था। फिर 15 मिनट की इस मुलाकात के बाद मैं फिल्म का हिस्सा बन गया।
संजय लीला भंसाली बहुत इत्मीनान से शूटिंग करते हैं। कभी-कभी तो हम एक दिन में सिर्फ दो शॉट्स की शूटिंग करते थे। एक बार मेरे इंट्रोडक्शन सीन की शूटिंग हो रही थी। मैंने लगभग 17-18 टेक लिए फिर भी परफेक्ट शॉट नहीं दे पाया। हालांकि, संजय सर नाराज नहीं हुए, उन्होंने मेरी दिक्कत समझी। फिर बाद में उस सीन की शूटिंग हुई। मगर, आज भी मलाल है कि मैंने उस सीन को परफेक्ट तरीके से प्ले क्यों नहीं किया है।’
दीपिका से बात करने में 2-3 घंटे लगे
‘इस फिल्म के सेट पर पहली बार दीपिका से मुलाकात हुई थी। उनके बात करने में मुझे 2-3 घंटे लगे थे। जाहिर है कि वे मेरे शहर की हैं, फिर भी थोड़ी झिझक थी। एक बात यह भी थी कि दीपिका उस वक्त तक बड़ी स्टार बन चुकी थीं।
दूसरी तरफ, रणवीर से पहले ही मुलाकात हो चुकी थी। हमने साथ में एक वर्कशॉप किया था। वे वाकई फिल्मी आदमी हैं।’
गुलशन फिल्मों के अलावा इन दिनों OTT पर छाए हुए हैं। 2023 को गुलशन अपना साल कहते हैं, क्योंकि उनकी एक फिल्म 8 A.M. मेट्रो और दो वेब सीरीज दहाड़ और गन्स एंड गुलाब इसी साल रिलीज हुई हैं। उन्होंने 2018 में वेब सीरीज स्मोक से OTT डेब्यू किया था।
घुटने के सारे लिगामेंट्स टूटने के बाद पहले शूटिंग खत्म की, फिर सर्जरी हुई
स्मोक की शूटिंग का किस्सा बताते हुए गुलशन कहते हैं, 'उस वक्त पत्नी के साथ कश्मीर ट्रिप पर गया था, तभी पहाड़ पर एक हादसा हुआ और मेरा घुटना बहुत बुरी तरह डैमेज हो गया। वो हादसा इतना खतरनाक था कि घुटने के सारे लिगामेंट्स पूरी तरह से टूट चुके थे और पैर के मसल्स भी सिकुड़ने लगे थे।
फिर चेकअप के दौरान डॉक्टर ने तुरंत सर्जरी कराने को कहा। हालांकि, सर्जरी को कुछ दिनों तक रोक कर मैंने पहले वेब सीरीज की शूटिंग पूरी की, उसके बाद ऑपरेशन कराया।
इसी बीच सर्जरी के दो महीने मेरे पास फिल्म ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ के डायरेक्टर वसन वाला पहुंचे और उन्होंने ये फिल्म करने के लिए कहा।
मैंने मन तो बना लिया था कि मैं यह मूवी जरूर करूंगा, लेकिन सामने सबसे बड़ा चैलेंज ये था कि इस फिल्म के लिए मुझे मार्शल आर्ट्स सीखना था। आप तो जानते ही हैं कि मार्शल आर्ट्स में ऊंचाई से कूदना, जंप करना, पैरों का अधिक यूज करना होता है, जो कि मेरे लिए उस समय काफी चैलेंजिंग था। मेरे मन में उस समय कुछ नेगेटिव बातें भी आई थीं, लेकिन मैंने उन बातों को साइड करके सिर्फ अपने दिल की बात सुनी। खुद पर मेहनत किया और उस फिल्म का हिस्सा बना।'
इसी के साथ हमारी बातचीत का सिलसिला खत्म हुआ और उन्होंने अगली मीटिंग का आश्वासन देते हुए फोन रख दिया….











