महाकाल महालोक बनने के बाद बढ़े दर्शनार्थी
पालकी झूलने लगती है
श्रद्धालु बैरिकेड़स लांघकर सवारी मार्ग पर आ रहे हैं। इससे पालकी की सुरक्षा को लेकर खतरा उत्पन्न होता जा रहा है। सैकड़ों श्रद्धालु पालकी के आसपास का सुरक्षा घेरा तोड़कर भगवान को हार फूल अर्पित करने पहुंच जाते हैं। इससे पालकी झूलने लगती है और पुजारी व कहारों को इसे संभालन के लिए काफी मशक्कत करना पड़ती है। प्रशासन को सवारी मार्ग पर भीड़ नियंत्रण के लिए और कड़े कदम उठाना होंगे।
हादसा टला, बैलों की जगह ट्रैक्टर का उपयोग हो
सोमवार को सवारी में जिस गरुड़ रथ पर भगवान महाकाल शिव तांडव रूप में शामिल थे, उस रथ को बैल खींच रहे थे। मंदिर से शुरू होकर सवारी कुछ ही दूर पहुंची थी कि भारी भीड़ को देखकर बैल बिदक गए। रथ के साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों ने बैलों को संभाला, बावजूद इसके पूरी सवारी में परेशानी होती रही। प्रशासन को रथ खींचने के लिए बैल के स्थान पर ट्रेक्टर का उपयोग करना चाहिए।
भीड़ में भगवान के अंगरक्षक दबे
पिछली तीन सवारी से मंदिर प्रशासन सभा मंडप में भीड़ नियंत्रित नहीं कर पा रहा है। सोमवार को तीसरी सवारी में भी सभा मंडप में मौजूद भीड़ अनियंत्रित हो गई। इससे पालकी नगर भ्रमण पर रवाना होते समय भगवान के अंगरक्षक महाकाल पाठक भीड़ में दब गए।
झांझ डमरू लेकर सवारी में घुस रहे सैकड़ों युवा
मंदिर व जिला प्रशासन सवारी में अनाधिकृत लोगों का प्रवेश भी प्रतिबंधित नहीं कर पा रहा है। प्रबंध समिति की बैठक में पारंपरिक नौ भजन मंडल को अनुमति देने का निर्णय लिया गया था। भजन मंडलों को सदस्य संख्या समिति रखने के निर्देश भी दिए गए थे। पहली सवारी में कुछ हद तक इस नियम का पालन भी हुआ। लेकिन दूसरी व तीसरी सवारी में सैकड़ों युवक झांझ डमरू लेकर अनाधिकृत रूप से सवारी में शामिल हो रहे हैं।
इनकी मौजूदगी से सवारी में भारी अव्यवस्था होती है, परंपरागत दलों को आगे बढ़ने में समय लगता है। इससे पालकी की चाल भी धीमी हो जाती है। यही कारण है पालकी समय पर मंदिर नहीं पहुंच पा रही है। प्रशासन को अनाधिकृत हुड़दंग करने वाले लोगों पर सख्ती से रोक लगाना चाहिए।











