पेराई सत्र को जल्दी शुरू करने में सबसे बड़ी रुकावट मजदूरों की कमी है। गन्ने की कटाई करने वाले मजदूर आमतौर पर नवंबर में दिवाली के आसपास ही अपने घरों से निकलते हैं। महाराष्ट्र में गन्ना कटाई मजदूरों के नेता गहिनी ठोर पाटिल के मुताबिक, मजदूर नवंबर के पहले सप्ताह से पहले अपने गांव से नहीं निकल पाएंगे। देश में गन्ने की कटाई में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन अभी भी यह इतना ज्यादा नहीं है कि मजदूरों की कमी को पूरा किया जा सके।
सरकार का प्लान फेल? समय से पहले गन्ने की पेराई शुरू नहीं कर पाएंगी मिलें, सस्ती चीनी का बढ़ेगा इंतजार
नई दिल्ली: देश की अधिकतर चीनी मिलों की ओर से चीनी के पेराई सत्र (Crushing Season) को 15 दिन पहले, यानी अक्टूबर में ही शुरू करने की संभावना बहुत कम नजर आ रही है। चीनी की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों पर लगाम लगाने के लिए उद्योग संगठनों ने सरकार से पेराई समय से पहले शुरू करने का वादा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा होना मुश्किल दिख रहा है।
पेराई सत्र को जल्दी शुरू करने में सबसे बड़ी रुकावट मजदूरों की कमी है। गन्ने की कटाई करने वाले मजदूर आमतौर पर नवंबर में दिवाली के आसपास ही अपने घरों से निकलते हैं। महाराष्ट्र में गन्ना कटाई मजदूरों के नेता गहिनी ठोर पाटिल के मुताबिक, मजदूर नवंबर के पहले सप्ताह से पहले अपने गांव से नहीं निकल पाएंगे। देश में गन्ने की कटाई में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन अभी भी यह इतना ज्यादा नहीं है कि मजदूरों की कमी को पूरा किया जा सके।
पेराई सत्र को जल्दी शुरू करने में सबसे बड़ी रुकावट मजदूरों की कमी है। गन्ने की कटाई करने वाले मजदूर आमतौर पर नवंबर में दिवाली के आसपास ही अपने घरों से निकलते हैं। महाराष्ट्र में गन्ना कटाई मजदूरों के नेता गहिनी ठोर पाटिल के मुताबिक, मजदूर नवंबर के पहले सप्ताह से पहले अपने गांव से नहीं निकल पाएंगे। देश में गन्ने की कटाई में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन अभी भी यह इतना ज्यादा नहीं है कि मजदूरों की कमी को पूरा किया जा सके।
