इंदौर। सरकार को शुक्रवार को हाई कोर्ट में बताना है कि क्लर्क कालोनी एक्सटेंशन और इलेक्ट्रानिक काम्प्लेक्स को बगैर विकास पूरा हुए पूर्णता प्रमाण पत्र कैसे जारी कर दिया गया। सरकार को यह जवाब उस जनहित याचिका में देना है जिसमें उक्त दोनों कालोनियों को बगैर विकास पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने का मुद्दा उठाया गया है।
जनहित याचिका एडवोकेट मनीष यादव के माध्यम से दायर हुई है। इसमें क्लर्क कालोनी एक्टेंशन और इलेक्ट्रानिक काम्प्लेक्स की वैधता को चुनौती दी गई है। कहा है कि तत्कालीन अधिकारियों ने कालोनाइजर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से साठगांठ कर फर्जी शपथ पत्र स्वीकारा है। बगैर मौका निरीक्षण किए अधिकारियों ने मान लिया कि इन दोनों कालोनियों में विकास पूरा हो गया है।
बगैर जांच न सिर्फ पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया गया बल्कि शासन के पास बंधक बनाए गए भूखंडों को बंधन मुक्त भी कर दिया गया। इसका लाभ उठाते हुए कालोनाइजर ने कमजोर आय वर्ग के लिए आरक्षित भूखंड बेच दिए। उपायुक्त सहकारिता ने भी जांच में गड़बड़ी की बात स्वीकारी थी। एडवोकेट यादव ने बताया कि हमने उक्त दोनों कालोनियों को अवैध घोषित करने की मांग भी की है।
न्यायालय परिसर में टाइपिंग करवाना हुआ महंगा
न्यायालय परिसर में दस्तावेज तैयार करवाना वकीलों और पक्षकारों की जेब पर भारी पड़ेगा। इंदौर जिला न्यायालय आवेदन-पत्र लेखक संघ के अध्यक्ष सत्यप्रकाश चौरसिया और सचिव गोपाल सोनी ने बताया कि मप्र उच्च न्यायालय के आदेश के बाद संशोधित दरें जारी कर दी गई हैं। जिला न्यायालय में कार्यरत अनुज्ञप्तिधारक टाइपिस्ट अब कंप्यूटर टाइपिंग के लिए 25 रुपये प्रति पेज और हस्त टंकन (मेन्यूअल टाइपिंग) के लिए 20 रुपये प्रति पेज के हिसाब से भुगतान प्राप्त कर सकेंगे।











