घरेलू बाजार में भी अप्रैल की शुरुआत में सोने की कीमत 70,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से ऊपर चली गई थीं और एमसीएक्स पर 75,000 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने के कगार पर थीं। हालांकि हाल में इसमें कुछ नरमी आई है और अभी यह 73,000 रुपये के आसपास है। फरमाहन ने कहा कि सोने की कीमतों में इस तेजी के कई कारण हैं। एक कारण यह है कि दुनिया के कई प्रमुख केंद्रीय बैंकों में सोना खरीदने की होड़ मची है। इसमें चीन, भारत और रूस शामिल हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद जब अमेरिका ने रूस की डॉलर वाली एसेट्स को फ्रीज किया तो वैश्विक निवेशकों का डॉलर पर भरोसा डगमगा गया। इससे केंद्रीय बैंक सोना खरीदने में लगे हैं। सोने की स्वीकार्यता के कारण इसे ग्लोबल करेंसी माना जाता है। इस कारण सोने की कीमत में तेजी आई है।
सोना या शेयर! जानिए पिछले पांच साल में किसने दिया ज्यादा रिटर्न
नई दिल्ली: पिछले पांच साल में गोल्ड ने 18% का सालाना रिटर्न दिया है जबकि इस दौरान निफ्टी में सालाना करीब 15% की तेजी आई है। हालांकि एक, तीन, 10 और 15 साल के आंकड़ों की बात करें तो निफ्टी ने सोने को पीछे छोड़ दिया है। सात साल की अवधि में, रिटर्न लगभग बराबर रहा। इस दौरान निफ्टी ने 15% सीएजीआर से रिटर्न दिया है जबकि सोने के 14% बढ़ोतरी रही। एंबिट ग्लोबल प्राइवेट क्लाइंट की सीईओ अमृता फरमाहन की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसके मुताबिक इस साल अब तक, वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें लगभग 20% करीब 2,390 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई हैं। पिछले महीने कुछ समय के लिए इसकी कीमत 2,400 डॉलर के स्तर को भी पार कर गई थी, जो इसका अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।











