भगवान कहते हैं कि यह संसार यहां के सभी मनुष्य और प्राणी मात्र मेरे हैं मेरी रचना से हैं अतः यहां भेदभाव मत करो हवा पानी मिट्टी आकाश सब पर सभी का अधिकार है मुझ पर भी सबका अधिकार है। मैं जानता हूं कि *मेरे नाम के धर्मस्थल बनाने पर मेरे प्रति आस्था को प्रबल करना है, परंतु इन धर्मस्थलों को व्यापारिक रूप ना दो और यहां बड़े छोटे वीआईपी और साधारण का भेदभाव ना रखो* , सब एक है विआईपी का मतलब यह नहीं की सबको रोक दो और उन्हें आने दो, मेरे यहां आने पर हर आदमी तन मन से पवित्र होना चाहिए उसकी दुर्भावना छट जानी चाहिए और सद्भावना का भाव पनपना चाहिए।
*मैं सभी के सुखों की कामना करता हूं उनके दुखों मैं उनके साथ रहना मेरा काम है। मुझे पैसे से ना जोडो मुझे अपने मन और अपनी आत्मा से जोड़ो।* मानव है तो मानवता का धर्म निभाओ सभी जीवो का एक समान का ध्यान रखो। पेड़ पौधे यह आप लोगों के लिए वरदान है इन पर बिना वजह कुल्हाड़ी ना चलाओ।
सब जिव सुखी रहे जगत मे ऐसा ही ध्यान धरो,
तन मन और आत्मा शुद्ध निश्चल रहे ऐसा ही ध्यान धरो।।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक पत्रकार पर्यावरणविद्)