भोपाल: 28 मई, 2025 l गांव की एक सामान्य गृहिणी से आत्मनिर्भर उद्यमी बनने की यह कहानी है श्रीमती गीता मीणा की, जो तारा सेवनिया की निवासी हैं। कभी वह अपने घर की चारदीवारी में सीमित थीं, लेकिन आज वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ हैं, बल्कि समाज में एक प्रेरणा का स्रोत भी बनी हुई हैं।
श्रीमती गीता बताती हैं कि पहले वह केवल घर का काम करती थीं और पारंपरिक रूप से पशुपालन से जुड़ी थीं। लेकिन जब उन्होंने अपने गांव की अन्य महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनते देखा, तो उनके भीतर भी कुछ कर दिखाने की जिज्ञासा जगी। वर्ष 2018 में उन्होंने मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर ‘कविता स्व-सहायता समूह’ की सदस्यता ली और यहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई।
गृहकार्य और पशुपालन के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और फिर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में भी कार्य करना शुरू किया। आज उनके पास 3 गायें और 5 भैंसें हैं, जिनसे वे प्रतिदिन 40 से 50 लीटर दूध बेचती हैं। इसके अलावा वे सिलाई, कढ़ाई और समूह में बुक कीपर का कार्य भी करती हैं।
उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें जिले की “लखपति दीदियों” में शामिल कर दिया है – वे महिलाएं जो अब लाखों की वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। आज श्रीमती गीता न केवल अपने बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च स्वयं उठा रही हैं, बल्कि उन्होंने अपने आत्म-सम्मान और पहचान को भी सशक्त रूप से स्थापित किया है।
वे कहती हैं “अजीविका मिशन ने मुझे न केवल आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि जीवन को जीने का एक नया नजरिया दिया है। आज जब मैं अपने बच्चों की जरूरतें खुद पूरी करती हूं, तब भीतर से एक गहरी संतुष्टि और आत्मविश्वास महसूस होता है। यह बदलाव मेरे लिए सपना सच होने जैसा है।”
श्रीमती गीता अपने भाव प्रकट करते हुए कहती हैं –“मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को दिल से धन्यवाद देती हूँ, जिन्होंने ऐसी योजनाओं के माध्यम से हम जैसी ग्रामीण महिलाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर और आत्मसम्मान दिया है।”











