ब्यावर में तेजाब फैक्ट्री के गोदाम में खड़े टैंकर से नाइट्रोजन गैस के लीक होने से कंपनी मालिक सहित 3 की मौत हो गई। दो लोगों की हालत अब भी गंभीर है।
हादसे से प्रभावित 60 से ज्यादा लोगों ब्यावर और अजमेर सरकारी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। गैस के असर से कई पालतू जानवर और आवारा कुत्तों की भी मौत हुई है।
घटना ब्यावर थाने के बाड़िया क्षेत्र की सुनील ट्रेडिंग कंपनी में सोमवार रात 10 बजे की है। फैक्ट्री के नजदीक के कई घरों को खाली करवाया गया है।
गैस को नियंत्रित करने में लगे कंपनी मालिक की मौत
इस हादसे में कंपनी मालिक सुनील सिंघल (47) की मौत हो गई। वो रातभर गैस को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अजमेर जेएलएन हॉस्पिटल रेफर किया गया था। सोमवार रात को ही इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
वहीं, मंगलवार सुबह दो और पीड़ित नरेंद्र सोलंकी (40) और दयाराम (52) ने भी दम तोड़ दिया। जेएलएन में दो मरीज अब भी गंभीर हालत में एडमिट हैं। इनमें ब्यावर निवासी बाबूलाल (54) पुत्र कालूजी, लक्ष्मी देवी (62) पत्नी कैलाश शामिल हैं।
कुछ सेंकेंड में गैस से भरा इलाका
जानकारी के अनुसार कंपनी के गोदाम में खड़े टैंकर से नाइट्रोजन गैस का रिसाव हुआ। रिसाव इतना तेज था कि कुछ सेकेंड में ही गैस आसपास के रिहायशी इलाके में फैल गई।
घरों के अंदर मौजूद लोग भी इसकी चपेट में आ गए। लोगों को दम घुटने के साथ आंखों में जलन की भी परेशानी हुई। मौके पर पहुंचे पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने पीड़ितों को हॉस्पिटल पहुंचाया।
अब पढ़िए- क्या बोले गैस प्रभावित:
फायरकर्मियों की भी हालत बिगड़ी
फायरकर्मी नवलेश कुमार ने बताया कि हमारे साथी अर्जुन सिंह, जितेंद्र कुमार और विक्की राठौड़ की तबीयत खराब है। उन्हें सीने में भारीपन, खांसी और उल्टियों की शिकायत हो रही है। गैस के प्रभाव के कारण टैंकर के पास जाना मुश्किल हो रहा था।
बदबू तेज हुई तो पुलिस को फोन किया
स्थानीय निवासी नंदेश्वर ने बताया कि सोमवार शाम करीब 6 बजे वह दुकान पर जाने के लिए निकले। इसी दौरान गैस लीकेज की जानकारी मिली। करीब 7 बजे बदबू अधिक तेज हो गई, तो उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन किया।
परिवार के साथ घर छोड़कर भागे
फैक्ट्री के नजदीक रहने वाले महेंद्र सिंघल ने बताया कि उन्होंने खुद ही परिवार को लेकर वहां से निकलने का फैसला किया। गैस के प्रभाव से आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और उल्टी जैसी समस्याएं होने लगी थीं।
प्रशासन ने एरिया खाली करवाया
वहीं, सूचना मिलने पर पुलिस, प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और रात करीब 11 बजे गैस लीकेज पर काबू पा लिया गया। साथ ही, एहतियातन फैक्ट्री के आसपास के क्षेत्र को खाली करवा दिया गया। स्थानीय क्षेत्र के लोगों में अभी भी दहशत का माहौल है।
कलेक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत ने फैक्ट्री को सीज करने के आदेश दिए हैं। वहीं, ब्यावर एसडीएम दिव्यांश सिंह ने बताया कि फैक्ट्री की जांच जारी है। नगर परिषद, राजस्व और पुलिस विभाग द्वारा सर्वे किया जाएगा। गैस लीकेज मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
लिक्विड नाइट्रोजन से जान जाने का खतरा
कनाडा के नेशनल कोलैबोरेटिंग सेंटर फॉर इन्वायरमेंटल हेल्थ की साल 2018 की एक स्टडी के मुताबिक, लिक्विड नाइट्रोजन एक लिक्विड है।
इसका बॉइलिंग पॉइंट बेहद कम -196°C है। इसलिए यह रूम टेम्प्रेचर में ही गैस फॉर्म में आ जाता है। इस लिक्विड से कोल्ड बर्न और फ्रॉस्टबाइट हो सकता है।
अत्यधिक ठंडा होने के कारण इसके पेट में जाने से अचानक सांस रुक सकती है या निगलने से दम घुट सकता है। यह स्थिति जानलेवा है।
अगर हमारी सांस या खाने में लिक्विड नाइट्रोजन चला जाए तो यह कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।