ईटी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि प्रपोजल को फॉर्मल शेयरहोल्डर मैंडेट नहीं माना जा सकता क्योंकि इसे सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने आधिकारिक रूप से मंजूरी नहीं दी है और इसे साइन किए गए वैलिड रेजोल्यूशन के तौर पर पेश नहीं किया गया था। टाटा संस ने कोई कमेंट नहीं किया।
क्या है मामला?
आरबीआई ने टाटा संस को अपर लेयर NBFC पर लागू नियमों का पालन करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही टाटा संस ने RBI के लिस्टिंग डायरेक्टिव का पालन करने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों ने कहा कि टाटा संस के रेगुलेटरी स्टेटस पर RBI के फैसले को शेयरहोल्डर्स के किसी दूसरे प्रपोजल से हटाया नहीं जा सकता और रेगुलेटर को खुद से सोचना होगा कि प्रस्तिवात रीस्ट्रक्चरिंग उसकी जरूरतों को पूरा करती है या नहीं।टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस बोर्ड को दो ऑपरेटिंग कंपनियों टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को होल्डिंग कंपनी में मर्ज करने का प्रस्ताव दिया था। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में 66% हिस्सेदारी है। उसका कहना है कि रीस्ट्रक्चरिंग से कंपनी को इतनी ऑपरेटिंग इनकम मिलेगी कि वह NBFC के लिए प्रिंसिपल-बिजनेस क्राइटेरिया से बाहर हो जाएगी।
