'35000 रुपए जुर्माना, 1000 लोगों को भोज दिया फिर भी नहीं अपनाया', दूसरी जाति में शादी करने पर एडवोकेट कपल को समाज ने ठुकराया
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23 Jul 2026, 12:39 PM
रायपुर: छत्तीसगढ़ में एक एडवोकेट कपल का सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। दोनों ने दावा किया है कि करीब एक साल से उन्हें शादियों और अंतिम संस्कार में शामिल होने से रोका जा रहा है। साथ ही समाज के लोगों से मिलने भी नहीं दिया जाता है। समाज ने शादी के लिए 35000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही एक हजार लोगों को दावत देने के लिए मजबूर किया है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ स्थित उनके गांव में उन्हें स्वीकार नहीं किया जा रहा है।एडवोकेट कपल ने पुलिस से की है शिकायत
कपल खैरागढ़ के देओरी गांव का रहने वाला है। दोनों ने अब पुलिस से संपर्क किया है। खुद को कम्युनिटी का नेता बताने वाले कुछ लोगों पर गैर-कानूनी तरीके से सोशल बॉयकॉट लागू करने का आरोप लगाया है। वकील नेमीचंद वर्मा ने सितंबर 2025 में साथी वकील प्रमिला सोनकर से शादी की थी। नेमीचंद लोधी कम्युनिटी से हैं और उनकी पत्नी प्रमिला दूसरी जाति से हैं।परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया
हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कपल ने आरोप लगाया कि शादी के तुरंत बाद लोधी कम्युनिटी के नेताओं ने उनके परिवार का हुक्का-पानी बंद घोषित कर दिया। यह सामाजिक बहिष्कार का एक पारंपरिक तरीका है, जिससे कम्युनिटी से सारे संबंध टूट जाते हैं।35000 रुपए का जुर्माना लगाया
वहीं, नेमीचंद ने आरोप लगाया कि कम्युनिटी की एक बैठक में उनके परिवार पर 35,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया और कम्युनिटी में वापस स्वीकार किए जाने की शर्त के तौर पर करीब 100 लोधी परिवारों के लिए दावत आयोजित करने का निर्देश दिया गया।सामाजिक बॉयकॉट जारी
नेमीचंद ने आरोप लगाया है कि पैसे देने और दावत आयोजित करने के बाद भी हमारा बहिष्कार जारी है। उन्होंने कम्युनिटी के कुछ सदस्यों के नाम बताए हैं और उन पर बहिष्कार लागू करने का आरोप लगाया है। जोड़े ने आरोप लगाया है कि कम्युनिटी के अलिखित नियमों का उल्लंघन करने पर दूसरे परिवारों पर भी अक्सर इसी तरह के जुर्माने लगाए जाते हैं, जिनमें कम्युनिटी दावत आयोजित करना और जुर्माना भरना शामिल है।काउंसलिंग की जाएगी
खैरागढ़ एसपी ने कहा कि दोनों पक्षों को समझाया-बुझाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसी तरह के विवादों में काउंसलिंग से सामाजिक संबंध बहाल करने में मदद मिली है।
सोशल बॉयकॉट को लेकर कानून की मांग
रायपुर के सोशल एक्टिविस्ट डॉ दिनेश मिश्रा लंबे समय से ऐसे कानून की मांग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि राज्य भर में ऐसे लगभग 40 हजार माले हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक ने सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ कानून बनाए हैं। छत्तीसगढ़ में भी ऐसे ही कानून पर विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि लंबे समय तक बहिष्कार के कारण कई मामलों में परिवारों को अपने गांव छोड़ने या बच्चों के भविष्य के लिए अपना धर्म बदलने तक के लिए मजबूर होना पड़ा है।