दरअसल, कोरोना के बढ़ते केस के चलते विभाग ने लोक स्वास्थ्य की आपात स्थिति से निपटने के लिए समय समय पर तैयारियों का सतत मूल्यांकन करता रहा है। जिसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी को सुनिश्चित करने के लिए सतत रूप से निगरानी की जा रही है। इस संबंध में विगत दिनों गवर्नमेंट और प्राइवेट हेल्थ संस्थानों में मॉक ड्रिल भी आयोजित हुआ है।
मॉक ड्रिल में इन फेसिलिटी की हुई जांच
भोपाल में हॉस्पिटल की मेडिकल सुविधाओं के साथ डॉक्टरों के अलर्टनेस के लिए जांच हुई। जिसमें एंबुलेंस, मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति, ऑक्सीजन प्लांट की कार्यक्षमता, अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता, आइसोलेशन वार्ड की उपलब्धता, मानव संसाधन क्षमता, कोविड परीक्षण की क्षमता, टैली मेडिसिन सेवाओं की उपलब्धता, लॉजिस्टिक की उपलब्धता के लिए मूल्यांकन किया जा चुका है।
मेडिकल फेसिलिटी की ये है स्थिति
वर्तमान में भोपाल जिले में 15,000 से अधिक हॉस्पिटल बेड उपलब्ध है। अस्पतालों में साढ़े तीन हजार से ज्यादा ऑक्सीजन सपोर्ट बिस्तर उपलब्ध हैं। इसके साथ ही दो हजार से अधिक आई सी यू बेड, 750 वेंटीलेटर बेड क्रियाशील हैं। जिले में 4 हजार से अधिक चिकित्सक, साढ़े छः हजार से ज़्यादा नर्सिंग ऑफिसर, 2 हज़ार पैरामेडिकल कर्मचारी, 150 एंबुलेंस उपलब्ध है। 21000 लीटर से अधिक क्षमता के 30 ऑक्सीजन प्लांट क्रियाशील है ।1 हजार से अधिक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर एवं 5 हजार से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था भोपाल जिले में है। सभी आवश्यक दवाइयां, मास्क,पी पी ई किट भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है।
भोपाल में नहीं है एक भी केस
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी ने बताया कि कोविड-19 के लक्षणों के आधार पर जांच सहित सभी निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप कार्य करने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देशित किया जा चुका है। भोपाल जिले में कोविड-19 संक्रमण का कोई भी केस नहीं मिला है। कोविड से डरने की कोई भी आवश्यकता नहीं है किंतु सतर्कता आवश्यक है। सभी बड़े शासकीय एवं निजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों में लिक्विड ऑक्सीजन स्टोरेज की पर्याप्त क्षमता है।











