पिंकविला से बात करते हुए, बप्पी लहिरी के पोते रेगो ने बताया, 'मेरे दादाजी ने यह घर 1983 में खरीदा था।' बाहर से देखने पर, सफेद रंग में बना यह घर शांत और सौम्य दिखता है, जिसके साथ एक बरामदा है। अंदर, एक बड़ा हॉल है जो उनके करियर से जुड़े पुरस्कारों और उपलब्धियों से सजा है। तीन साल की उम्र में तबला वादन के लिए मिले पहले पदक से लेकर उनकी बाद की उपलब्धियों तक, इसमें सब है।
बप्पी लहिरी के घर में आज भी हैं 1000 गणेश मूर्तियां, सोने की कुर्सी और किशोर दा की वो आखिरी फोटो
बप्पी लहिरी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत संगीत के जरिए और उनके मुंबई स्थित घर की दीवारों में आज भी गूंज रही है। हाल ही में, उनके पोते ने उस प्रतिष्ठित घर की एक झलक दिखाई, जिसे सिंगर ने कथित तौर पर 1983 में 19.32 लाख रुपये में खरीदा था। आज यह घर अनमोल है - न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि इसमें संजोई गई यादों, पुरस्कारों, तस्वीरों और फैंस द्वारा बनाई गई कलाकृतियों के लिए भी। भगवान गणेश के परम भक्त बप्पी हर बड़े प्रोजेक्ट, खासकर संगीत दौरों से पहले सिद्धिविनायक मंदिर जाना अपना कर्तव्य मानते थे। उनकी आस्था उनके घर में गहराई से झलकती है, जिसमें वर्षों से एकत्रित 1,000 से अधिक गणेश प्रतिमाएं रखी हुई हैं।
पिंकविला से बात करते हुए, बप्पी लहिरी के पोते रेगो ने बताया, 'मेरे दादाजी ने यह घर 1983 में खरीदा था।' बाहर से देखने पर, सफेद रंग में बना यह घर शांत और सौम्य दिखता है, जिसके साथ एक बरामदा है। अंदर, एक बड़ा हॉल है जो उनके करियर से जुड़े पुरस्कारों और उपलब्धियों से सजा है। तीन साल की उम्र में तबला वादन के लिए मिले पहले पदक से लेकर उनकी बाद की उपलब्धियों तक, इसमें सब है।
पिंकविला से बात करते हुए, बप्पी लहिरी के पोते रेगो ने बताया, 'मेरे दादाजी ने यह घर 1983 में खरीदा था।' बाहर से देखने पर, सफेद रंग में बना यह घर शांत और सौम्य दिखता है, जिसके साथ एक बरामदा है। अंदर, एक बड़ा हॉल है जो उनके करियर से जुड़े पुरस्कारों और उपलब्धियों से सजा है। तीन साल की उम्र में तबला वादन के लिए मिले पहले पदक से लेकर उनकी बाद की उपलब्धियों तक, इसमें सब है।











