** मुख्यमंत्री पद के एक और दावेदार....
** प्रदेश के अरबपति मंत्रियों में हैं शामिल...
फिलहाल तो 'दिल्ली दूर' है,लेकिन मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार कैडर बेस बीजेपी में फ्री फॉर आल की स्थिति बनने से अगली पारी में सीएम पद के दावेदारों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। विधानसभा चुनाव में केन्द्र मे सक्रिय कई बड़े चेहरे उतारे जाने से मुख्यमंत्री बनने की तमन्ना पाले मध्यप्रदेश के कुछ पुराने नेता भी पीछे रहना नहीं चाहते हैं।
इसके चलते हाल ही में आठ बार के विधायक , अठारह साल से बीजेपी सरकार में मंत्री और कमलनाथ सरकार में नेता प्रतिपक्ष रहे गोपाल भार्गव ने भी गुरुवाणी के संकेत की आड़ में मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा ठोंक दिया है। अपनी सीट से बेटे को टिकट दिलाने की जोड़ तोड़ में सफल नहीं हो पाने के बाद अब उन्होंने नया राग अलापना शुरू कर दिया है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गुरूजी का आदेश है कि मैं एक चुनाव और लड़ूॅं।अपने दावे में भार्गव यह कहने से भी नहीं चूके कि मैं तो बतौर नेता प्रतिपक्ष 108 विधायकों का नेता रह ही चुका हूं तो आगे 116 विधायकों का नेता क्यों नहीं हो सकता? मुख्यमंत्री बनने की हसरत को अप्रत्यक्ष रूप से उजागर करते हुए भार्गव ने कहा कि जब गुरूजी ने यह बात कही हैं तो हो सकता हस्तरेखा प्रबल हों और मुझे भी ताज पहनने का मौका मिल जाए..
हालांकि 18 साल से मंत्री रहते हुए गोपाल भार्गव ने विभिन्न विभागों का मंत्री रहते हुए कोई भी ऐसा उल्लेखनीय काम नहीं किया जो उन्हें मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल करा पाता। शिवराज सरकार के वर्तमान कार्यकाल में भी उन्हें लोक निर्माण विभाग जैसा भारी भरकम महकमा सौंपा गया लेकिन वे इसके जरिए मध्यप्रदेश यादगार निर्माण कार्य करवाने की जगह स्वार्थ सिद्धि में ही जुटे रहे। इसके चलते उन्होंने मध्यप्रदेश में ऐसे लोक निर्माण मंत्री के रूप में जरुर पहचान बना ली जिन्होंने कभी विभाग की समीक्षा बैठक तक नहीं लेने का नया कीर्तिमान भी बनाया। लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने मौजूदा कार्यकाल में उनके भोपाल स्थित बंगले पर तैनात कांग्रेसी नेताओं के करीबी रहे चुके दो रत्नों यानि अधिकारियों आर.के.राय और के .जी.कुकरैती के जरिए लोक निर्माण विभाग में जिस तरह की कार्यशैली अपनाई उससे घटिया निर्माण कार्यों और भ्रष्टाचार को ही बल मिला। साथ ही गुणवत्ता पूर्ण निर्माण कार्य से मध्यप्रदेश को स्वर्णिम प्रदेश बनाने का सपना तार तार हो गया।
यदि बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा वाली कहावत सच हो गई तो शिवराज सरकार के कथित 18 साल के विकास को 18 साल पीछे जाने से कोई नहीं रोक सकता है।











