देश में दलित राजनीति की जोर आजमाइश का केंद्र बनेगा डॉ. आंबेडकर का जन्म स्थान महू… क्या है भाजपा-कांग्रेस की रणनीति

देश में दलित राजनीति की जोर आजमाइश का केंद्र बनेगा डॉ. आंबेडकर का जन्म स्थान महू… क्या है भाजपा-कांग्रेस की रणनीति
 भोपाल। देश में दलित राजनीति की धुरी बन चुके डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जन्मस्थली महू कांग्रेस और भाजपा के लिए सियासी जोर आजमाइश का केंद्र बनने जा रही है। कांग्रेस 27 जनवरी को ‘जय बापू, जय भीम, जय संविधान’ अभियान के तहत रैली आयोजित कर रही है, वहीं भाजपा अपने दिग्गजों को उतारेगी, जो कांग्रेस को आंबेडकर विरोधी बताने के लिए मुखर होंगे। -दरअसल, लोकसभा चुनाव में दलित वोट और सीटों के आंकड़ों ने कांग्रेस और भाजपा की सक्रियता बढ़ा दी है। एससी सीटों को देखें तो 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस छह से 20 पर पहुंच गई, जबकि भाजपा 46 से 30 पर आ गई।

हालांकि आंकड़े बताते हैं कि वोट शेयर भाजपा के साथ 31 प्रतिशत, तो कांग्रेस के साथ 19 प्रतिशत है। मध्य प्रदेश के 2023 के विधानसभा चुनाव में एससी आरक्षित सीटों को देखें तो भाजपा को 26, तो कांग्रेस को नौ सीटों पर जीत मिली है।

कांग्रेस की रणनीति


माना जा रहा है कि राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में दलित राजनीति को लेकर मुखर होने के लिए जीतू पटवारी को फ्री हैंड दिया है। इधर, दलित वर्ग को साधने की होड़ में कांग्रेस ने तैयारी तेज कर दी है।


महू की रैली में पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद प्रियंका वाड्रा शामिल होंगे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कथित बयान को दलित विरोधी बताकर सहानुभूति लेने की कोशिश करेंगे।

क्या करेगी भाजपा

  • भाजपा प्रदेश में भाजपा के दिग्गज नेताओं को लाकर कांग्रेस का जवाब देगी। भाजपा जानती है कि डॉ. आंबेडकर की जन्मस्थली का राजनीतिक उपयोग कर कांग्रेस जो संदेश देना चाहती है, वह दूर तलक जा सकता है, इसलिए वह आक्रामक तरीके से जवाब देगी।
  • भाजपा बताएगी कि किस तरह कांग्रेस ने दलित वर्ग को केवल वोट बैंक माना और उसके लिए कुछ नहीं किया। खुद मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक के आंबेडकर विरोधी होने का तथ्य सामने रख रहे हैं।

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