देश के कई इलाकों में खराब हुई हवा
बच्चें, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, पहले से बीमार लोगों के साथ-साथ ट्रैफिक पुलिस और सफाई कर्मचारी जैसे लोग प्रदूषण के खतरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। डॉ. गोयल ने अपनी चिट्ठी में इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सभी राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभागों और अस्पतालों से तैयारी बढ़ाने का आग्रह किया है।
उन्होंने जन जागरूकता अभियान चलाने, क्षेत्रीय भाषाओं में मीडिया के जरिए जरूरी जानकारी देने, स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करने और वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों की निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। डॉ. गोयल ने अपनी चिट्ठी में कहा, 'इस समय लोगों को हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से बचाने के तरीकों के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है।'
क्या करें, क्या नहीं जान लें पूरी बात
डॉ. गोयल का सुझाव है कि लोग घर से बाहर निकलने से पहले सरकारी मोबाइल ऐप के जरिए हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) की जांच करें। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और घर में खाना पकाने, रोशनी और गर्मी के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करें।
खासकर बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और सांस एवं दिल की बीमारी वाले लोग खेलकूद जैसी बाहरी गतिविधियों से बचें।
अगर किसी को वायु प्रदूषण के कारण कोई परेशानी या लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।











