मिली जानकारी के मुताबिक, 30 सितंबर, 2022 को नृपेंद्र मिश्र ने इस म्यूजियम को मंदिर ट्रस्ट को सौंपने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेजा था। इस पर यूपी कैबिनेट ने जुलाई 2023 महीने में मंजूरी दे दी थी। 9 अक्टूबर, 2023 को इस संग्रहालय और मंदिर ट्रस्ट के बीच एमओयू के एक दिन पहले मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोंविद देव गिरी ने विहिप के संरक्षक मंडल के सदस्य दिनेश के साथ इसका निरीक्षण किया और कहा कि मंदिर ट्रस्ट और प्रदेश सरकार मिल कर इस अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय को अयोध्या के पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण के केंद्र के रूप में विकसित करेंगे।
12:31 करोड़ में बना था संग्रहालय
संग्रहालय से जुड़े रहे अधिकारी के मुताबिक इस संग्रहालय की स्थापना 1988 में अयोध्या के तुलसी स्मारक भवन में की गई थी। उसके बाद 2015 में इसका अपना भवन का निर्माण सरयूतट पर राम कथा पार्क के पास किया गया जो 12:31 करोड़ रू के बजट में तैयार किया गया। राम कथा संग्रहालय परिसर 3 एकड़ जमीन पर स्थित है। इसके दो मंजिला भवन में 7 गैलरी हाल, आडोटोरियम और राम दरबार बने हैं। इसी भवन में इस समय अयोध्या शोध संस्थान का दफ्तर भी संचालित है।
दुर्लभ सामाग्रियों का है संग्रह
गुमनामी बाबा की गैलरी भी
अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में गुमनामी बाबा की गैलरी भी बनी है। इसमें रहस्यमयी बाबा के आवास रामभवन से मिली बड़ी संख्या में सामग्री को रखा गया है जो नेता जी सुभाषचंद्र बोस जुड़ी हैं। इनमे दुर्लभ पुस्तकें ,घड़ी, अखबार की कटिंग के अलावा अन्य सामाग्री हैंजो हाई कोर्ट के आदेश के बाद ट्रेजरी के डबल लाक में रखे सामानों को राम कथा संग्रहालय में शिफ्ट किया गया था। इसकी इंवेट्री तैयार करने में और शिफ्ट करने में कई हफ्ते लगे थे। हांलाकि गुमनामी बाबा के सामानों की गैलरी बनी है। लेकिन कई साल बीतने के बाद भी अभी तक इसका लोकार्पण कर आमजन के लिए इसे खोला नहीं गया है।











