जिला पंचायत सदस्य पति पर डाक्टर का घर खाली कराने का आरोप, पीड़ित ने जनसुनवाई में लगाई गुहार

जिला पंचायत सदस्य पति पर डाक्टर का घर खाली कराने का आरोप, पीड़ित ने जनसुनवाई में लगाई गुहार
भोपाल। जिला पंचायत सदस्य रश्मि भार्गव के पति और कांग्रेस नेता अवनीश भार्गव पर एक डाक्टर ने उसका घर खाली कराने के आरोप लगाए हैं। डाक्टर का आरोप है कि उसका घर कांग्रेस नेता के कहने पर एक स्टाफ नर्स के लिए खाली कराया जा रहा है। परेशान डाक्टर ने कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान आवेदन देते हुए न्याय की गुहार लगाई है। कलेक्टर आशीष सिंह ने डाक्टर की शिकायत पर मामले की जांच सीएमएचओ प्रभाकर तिवारी को सौंप दी है। वहीं जनसुनवाई में 128 आवेदकों ने विभिन्न समस्याओं को लेकर शिकायत की है। जिनकी सुनवाई एडीएम प्रकाश सिंह चौहान ने करते हुए निराकरण के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।

जानकारी के अनुसार डा. मनोज विश्वकर्मा ने कलेक्टर आशीष सिंह को शिकायती आवेदन देते हुए बताया कि वह दंत चिकित्सक हैं और सिविल अस्पताल बैरसिया में पदस्थ हैं। वह डेंटल ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी में भी दिन व रात ड्यूटी करते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने कोरोना काल में 14-14 घंटे कार्य किया है। इसी वजह से पूर्व बीएमओ डा. किरण वाडिवा ने डाक्टर को ई टाइप क्वार्टर दिया था, जिसकी उन्होंने 15 से 20 हजार रुपये से मरम्मत कराई थी। इसके बाद वर्तमान बीएमओ डा. पुष्पा गुरु ने उनका ई टाइप क्वार्टर खुद के लिए लेकर एफ टाइप क्वार्टर दिया था। जिसकी मनोज ने 20 से 25 हजार रुपये से मरम्मत कराई थी। जिसमें वह पिछले डेढ़ साल से परिवार सहित रह रहे हैं। साथ ही चिकित्सकीय सेवाएं भी दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस नेता अवनीश भार्गव के कहने पर संविदा स्टाफ नर्स मोनी भार्गव के लिए खाली कराया जा रहा है।

कांग्रेस नेता ने आरोपों को नकारा

कांग्रेस नेता अवनीश भार्गव ने बताया कि मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं है। मेरा मामले से कोई लेना-देना नहीं है और मैं किसी डाक्टर का घर क्यों खाली करवाऊंगा। मुझे बदनाम करने के लिए यह झूठी शिकायत की गई है, जिसकी मैं जांच करवाऊंगा।

कोचिंग संचालक ने छात्रा से की बदसलूकी

एक छात्रा ने शिकायत करते हुए बताया कि वह यूपीएससी की तैयारी के लिए एमपीनगर की एक्सीलेंस आइएएस कोचिंग में प्रवेश लिया था। जिसके लिए 50 हजार रुपये वार्षिक फीस तय की गई, लेकिन 25 दिन पढ़ाने के बाद ही 15 हजार रुपये देने के बाद 40 हजार की मांग की जाने लगी। यह राशि कोचिंग संचालक अरविंद नेमा ने मांगी। कोचिंग संचालक ने पैसे लेने के बाद शिक्षा सामग्री नहीं दी। जब छात्रा पिता के साथ कोचिंग गई तो संचालक गाली- गलौज करते हुए बदतमीजी करने लगा। पीड़िता ने एमपीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई तो वह कलेक्टर से शिकायत करने पहुंची। जिससे मामले की जांच हमीदिया कालेज के प्राचार्य को दी गई है।
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