'धुरंधर 2' के खिलाफ याचिका एक सैन्यकर्मी द्वारा दायर की गई थी, जो व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हुआ। उसने दावा किया कि फिल्म में कुछ ऐसे सीन्स हैं, जिनमें सेना और सुरक्षा बलों द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों, ऑपरेशनल तरीकों और संवेदनशील लोकेशनों को बहुत स्पष्टता के साथ दिखाया गया है, और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि भले ही फिल्म को 'फिक्शन' बताया गया हो, लेकिन इस तरह का चित्रण देश की सुरक्षा और अखंडता के हित में नहीं माना जा सकता। यह उसके लिए खतरा है।
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया कि उसने 23 मार्च 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व भी भेजा था, जिसमें फिल्म के कई सीन्स पर आपत्ति दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उसने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिका को प्रतिनिधित्व मानते हुए सक्षम प्राधिकारी पूरे मामले पर विचार करे और जरूरी लगने पर 'सुधारात्मक कदम' उठाए। साथ ही, लिया गया निर्णय याचिकाकर्ता को भी सूचित किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।











