बुधवार को धनुष ने वाराणसी से कई तस्वीरें पोस्ट कीं, जिनमें से कुछ में 'तेरे इश्क में' और 'रांझणा' के निर्देशक आनंद एल राय भी नजर आए। अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने लिखा, 'यादों की उस गली में टहलना जहां से ये सब शुरू हुआ था। कुंदन। एक ऐसा किरदार जो एक दशक से भी ज़्यादा समय बाद भी मुझे जाने नहीं देता। कुंदन का नाम आज भी बनारस की तंग गलियों में गूंजता है जब लोग मुझे पुकारते हैं और मैं अब भी मुड़कर मुस्कुरा देता हूं। अब उन्हीं गलियों से गुजरना, उसी घर के सामने बैठना, उसी चाय की दुकान से चाय की चुस्की लेना और उस आदमी के साथ पवित्र गंगा के किनारे टहलना जिसने मुझे कुंदन दिया, एक चक्र पूरा होने जैसा लगता है। अब शंकर का समय है। तेरे इश्क में...। हर हर महादेव।'
बनारस की तंग गलियों में भटके धनुष, कुंदन के अल्हड़पन पर दिल हारीं मृणाल ठाकुर, फिर याद आया 2013 वाला 'रांझणा'
धनुष ने हाल ही में वाराणसी की अपनी यात्रा की कई तस्वीरें शेयर कीं और याद दिलाया कि यही वह शहर है जहां आनंद एल राय की फिल्म 'रांझणा' में कुंदन के रूप में उनका सफर शुरू हुआ था। उनके इस भावुक पोस्ट ने तुरंत ध्यान खींचा, खासकर तब जब एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर ने लिंकअप वाली अफवाहों के बीच एक कमेंट कर दिया।
बुधवार को धनुष ने वाराणसी से कई तस्वीरें पोस्ट कीं, जिनमें से कुछ में 'तेरे इश्क में' और 'रांझणा' के निर्देशक आनंद एल राय भी नजर आए। अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने लिखा, 'यादों की उस गली में टहलना जहां से ये सब शुरू हुआ था। कुंदन। एक ऐसा किरदार जो एक दशक से भी ज़्यादा समय बाद भी मुझे जाने नहीं देता। कुंदन का नाम आज भी बनारस की तंग गलियों में गूंजता है जब लोग मुझे पुकारते हैं और मैं अब भी मुड़कर मुस्कुरा देता हूं। अब उन्हीं गलियों से गुजरना, उसी घर के सामने बैठना, उसी चाय की दुकान से चाय की चुस्की लेना और उस आदमी के साथ पवित्र गंगा के किनारे टहलना जिसने मुझे कुंदन दिया, एक चक्र पूरा होने जैसा लगता है। अब शंकर का समय है। तेरे इश्क में...। हर हर महादेव।'
बुधवार को धनुष ने वाराणसी से कई तस्वीरें पोस्ट कीं, जिनमें से कुछ में 'तेरे इश्क में' और 'रांझणा' के निर्देशक आनंद एल राय भी नजर आए। अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने लिखा, 'यादों की उस गली में टहलना जहां से ये सब शुरू हुआ था। कुंदन। एक ऐसा किरदार जो एक दशक से भी ज़्यादा समय बाद भी मुझे जाने नहीं देता। कुंदन का नाम आज भी बनारस की तंग गलियों में गूंजता है जब लोग मुझे पुकारते हैं और मैं अब भी मुड़कर मुस्कुरा देता हूं। अब उन्हीं गलियों से गुजरना, उसी घर के सामने बैठना, उसी चाय की दुकान से चाय की चुस्की लेना और उस आदमी के साथ पवित्र गंगा के किनारे टहलना जिसने मुझे कुंदन दिया, एक चक्र पूरा होने जैसा लगता है। अब शंकर का समय है। तेरे इश्क में...। हर हर महादेव।'











