आरबीआई के इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह यह है कि भारत में खुदरा महंगाई दर ( Retail Inflation ) फिलहाल नियंत्रण में है। अप्रैल के महीने में खुदरा महंगाई घटकर 3.48% पर आ गई थी, जो केंद्रीय बैंक के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से नीचे है। पिछले एक साल से अधिक समय से महंगाई का ग्राफ इस लक्ष्य से नीचे बना हुआ है, जिसके कारण नीति निर्माताओं को तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत महसूस नहीं हुई।
कच्चे तेल का झटका और कमजोर होता रुपया, फिर भी RBI ने क्यों नहीं बढ़ाया रेपो रेट
नई दिल्ली: दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये के दबाव के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला लिया। आरबीआई का यह कदम घरेलू आर्थिक विकास को रफ्तार देने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को दिखाता है।
आरबीआई के इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह यह है कि भारत में खुदरा महंगाई दर ( Retail Inflation ) फिलहाल नियंत्रण में है। अप्रैल के महीने में खुदरा महंगाई घटकर 3.48% पर आ गई थी, जो केंद्रीय बैंक के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से नीचे है। पिछले एक साल से अधिक समय से महंगाई का ग्राफ इस लक्ष्य से नीचे बना हुआ है, जिसके कारण नीति निर्माताओं को तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत महसूस नहीं हुई।
आरबीआई के इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह यह है कि भारत में खुदरा महंगाई दर ( Retail Inflation ) फिलहाल नियंत्रण में है। अप्रैल के महीने में खुदरा महंगाई घटकर 3.48% पर आ गई थी, जो केंद्रीय बैंक के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से नीचे है। पिछले एक साल से अधिक समय से महंगाई का ग्राफ इस लक्ष्य से नीचे बना हुआ है, जिसके कारण नीति निर्माताओं को तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत महसूस नहीं हुई।
