करलाखा और कोचवाजी के गौठान में गौमूत्र से हो रही है, नशे की संजीवनी ब्रह्मास्त्र तैयार

करलाखा और कोचवाजी के गौठान में गौमूत्र से हो रही है, नशे की संजीवनी ब्रह्मास्त्र तैयार
 राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है। इसके अंतर्गत ग्रामीण कृषि, पशुपालन और उनके उत्पाद तथा अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग स्थानीय स्तर पर कृषि एवं उस आधार पर उद्यम में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री बैंचल की गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में पशुपालकों से 2 रुपये प्रति किलो गोबर और 4 रुपये प्रति लीटर प्रति लीटर की दर से गौमूत्र की मात्रा की जा रही है। जैविक खेती के लिए गोबर का उपयोग वर्मी खाद बनाना और गौमूत्र का उपयोग कीटनाशक दवा ब्रह्मास्त्र और वृद्धि अनुसंधान जीवामृत बनाना जारी है। राज्य की स्व-सहायता समूह की महिलाएं इससे जुड़ी हुई हैं।

नारायणपुर जिले के ग्राम कर्लखा और कोचगही के गौठान में गौमूत्र से ब्रह्मास्त्र और जीवामृत बनाया जा रहा है। वर्तमान में जब रसायन युक्त खेती के कई जैविक प्रभावों से हमें डांटना पड़ रहा है, तब जैविक खेती को निषेध की भी शुरुआत हो रही है। जैविक खेती में मुख्य रूप से गोबर खाद का उपयोग किया जाता है, लेकिन कीट केटों से बचाव के लिए कोई विशेष उपाय नहीं किया जा रहा है, जिससे अधिकांश किसानों का आर्थिक नुकसान हो रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार का एक महत्वपूर्ण नवाचार गौमूत्र से औषधि किसानों की मुक्ति के लिए संजीवनी सिद्ध हो रही है। 

जिले के किसानों के लिए जैविक दवा उपलब्ध कराने की योजना जिला प्रशासन द्वारा गौठानों में स्व-सहायता समूह के सदस्यों के माध्यम से गौमूत्र से ब्रह्मास्त्र और जीवामृत तैयार किया जा रहा है। गौमूत्र विशेष गुणों से युक्त होता है, जिसका उपयोग विभिन्न कार्यों में किया जाता है। इसे बनाने के लिए गौमूत्र की पांच प्रकार की खपत जैसे नीम, करंजी, पपीता, सीताफल और अमरुद के साथ स्टॉकर को ठंडा किया जा रहा है और अवैध रूप से बेचा जा रहा है। इसका उपयोग करने के लिए 5 किलोवाट ब्रह्मास्त्र को प्रति वर्ष 100 किलोलीटर पानी में मिलाकर हर पांच महीने में उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त किसानों की मांग के अनुसार गौमूत्र वृद्धि उत्पाद का उत्पादन भी जारी है। एक लीटर ब्रह्मास्त्र वास्तुशिल्प रुपये में और वृद्धि चारित्रिक रुपये में कर्लखा एवं कोचवाडी गौठान और सी-मार्ट से खरीदा जा सकता है। केरला में लेडीज की क्वीन महिला स्व-सहायता समूह और कोचवाजी में सरस्वती महिला स्व सहायता समूह द्वारा इन महलाओं को 64 हजार 950 डॉलर की आय का निर्धारण किया गया है। रसायन मुक्त भोजन और स्वस्थ्य रसायन के लिए गौमूत्र आधारित खेती की वर्तमान मांग है। गौठान में स्व सहायता समूह की महिलाओं को ब्रह्मास्त्र बनाने के साथ ही स्व-रोजगार मिल रही है, जिससे समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।
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