भोपाल। मप्र में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए दोनों प्रमुख दलों के राष्ट्रीय नेताओं के दौरे भी बढ़ गए हैं। इसी सिलसिले में बुधवार को भोपाल पहुंचे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा का फोकस आदिवासियों के हितों के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे कार्यों के प्रचार पर रहा। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस ने अपनी सरकारों में जनजातीय समाज की सदैव उपेक्षा की और इनके हितों की अनदेखी करती रही, इसीलिए देश-प्रदेश की जनता ने उसे नकार दिया है। अब फिर से कांग्रेस जनजातीय समाज के लोगों को भ्रमित करने में जुटी है। कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में उन बातों को भी शामिल कर लिया है, जिन्हें भाजपा की सरकार पहले ही लागू कर चुकी है।
ओबीसी सीएम के सवाल को टाला
इस सवाल पर कि क्या प्रदेश में ओबीसी मुख्यमंत्री बनेगा तो मुंडा ने कहा कि यह विधायक दल तय करेगा। राजधानी स्थित भाजपा के प्रदेश मीडिया सेंटर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए केंद्रीय मंत्री मुंडा ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने जनजातीय समाज के लिए न शिक्षा और स्वास्थ्य की चिंता की, न आवागमन और सिंचाई जैसी सुविधाओं पर फोकस किया। यही वजह रही कि कांग्रेस के शासनकाल में जनजातीय समाज के लोगों का सबसे ज्यादा विस्थापन और पलायन हुआ। जबकि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार ने जनजातियों के लिए कई बड़े कार्य किए हैं।
भाजपा सरकारों के काम गिनाए
मध्य प्रदेश में 63 एकलव्य स्कूल बनाने का काम चल रहा है। जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने जनजातीय कार्य मंत्रालय बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने नारी शक्ति वंदन कानून बनाने का काम किया, जिससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को घेरा
मुंडा ने कहा कि कांग्रेस ने पेसा कानून बनाया, पर इसे लागू नहीं किया। कमल नाथ सरकार ने बैगा, भारिया और सहरिया जनजाति की महिलाओं के व्यक्तिगत आर्थिक मदद के लिए पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं को बंद कर दिया था, जिसे शिवराज सरकार ने फिर से शुरू किया। जबकि विधानसभा चुनाव के चलते कांग्रेस सिर्फ आश्वासन के पुल बांध रही है।











