इंदौर। कभी शहर के मिल क्षेत्र के रूप में पहचाना जाने वाला विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था, लेकिन तीन दशक से इस गढ़ को दोबारा हासिल करने के लिए कांग्रेस लगातार प्रयोग कर रही है। इस दौरान हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने हर बार नया उम्मीदवार मैदान में उतारा जबकि भाजपा ने दो ही उम्मीदवारों पर दांव लगाया।
कपड़ा मिलों की बस्ती रहा यह विधानसभा क्षेत्र 1972 से 1990 तक कांग्रेस की विधानसभा सीट रही। इस पूरी अवधि में पार्टी ने कन्हैयालाल यादव को दो बार मैदान में उतारा था। 1993 से कांग्रेस ने विधानसभा दो से जीत हासिल नहीं की। 1993 से लेकर 2018 तक सीट पर भाजपा के दो उम्मीदवार कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला ही रहे।
18 साल बाद फिर उतरे थे सेठ
कांग्रेस नेता सुरेश सेठ सरकार में मंत्री रहने के साथ ही महापौर भी रहे। आखिरी बार 1990 में कांग्रेस की तरफ से इंदौर-दो से सेठ विधायक रहे। चुनाव जीतने के बावजूद कांग्रेस ने 1993 में इन्हें कैलाश विजयवर्गीय के सामने नहीं उतारा। कांग्रेस ने 18 साल बाद सेठ को दोबारा विधानसभा क्षेत्र दो से टिकट दिया, लेकिन उस दौरान भाजपा ने यहां से नया चेहरा उताराते हुए रमेश मेंदोला को प्रत्याशी बनाया था।











