भरत तिवारी एनकाउंटर पर सीएम सम्राट ने तोड़ी चुप्पी! दबाव की राजनीति के खिलाफ दो टूक

भरत तिवारी एनकाउंटर पर सीएम सम्राट ने तोड़ी चुप्पी! दबाव की राजनीति के खिलाफ दो टूक
पटना: भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर पर अब तक मौन रहे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महापंचायत और जनता के सवालों के बीच बड़ा फैसला लिया है। जातीय पृष्ठभूमि पर हो रही राजनीतिक घेराबंदी के खिलाफ एनडीए सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। मुख्यमंत्री न केवल न्यायिक प्रक्रिया के साथ खड़े हैं, बल्कि जांच को पूरी पारदर्शिता से आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। इस मामले में निष्पक्षता दिखाते हुए सरकार ने अब तक स्थानीय थानेदार, एसडीपीओ (SDPO) पर गाज गिरा दी है।


पुलिसकर्मियों का सस्पेंशन

भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में उनकी मां आशा देवी ने जो आवेदन दिया था उसके आधार पर सबसे पहले जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और शाहपुर थानाध्यक्ष सहित अन्य सहयोगी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध शाहपुर थाने में मामला दर्ज किया गया। बाद में इस केस में अब तक पांच पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया। इनमें तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार,एएसआई अंकित आर्यन, एएसआई हरिश्चंद्र कुमार, एएसआई रामाशंकर यादव और महिला सिपाही मीरा कुमारी शामिल हैं।

जगदीशपुर के एसडीपीओ हटे

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सम्राट सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश शर्मा को उनके पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया। एनकाउंटर में शामिल एसएचओ राजेश मलाकार सहित 5 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सस्पेंड तो पहले ही कर दिया गया।
भोजपुर का भरत तिवारी एनकाउंटर मामला क्या है?
  • भोजपुर के बिलौटी गांव में कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत तिवारी मारे गए।
  • घटना के बाद स्थानीय जनता और महापंचायत ने भारी हंगामा किया।
  • राजनीतिक दलों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताकर सरकार को घेरा।
  • कार्रवाई करते हुए सरकार ने भोजपुर पुलिस पर कार्रवाई की।
  • मामले की पारदर्शिता बनाए रखने हेतु न्यायिक जांच जारी है।


शुरू हुई न्यायिक जांच

भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सम्राट सरकार ने न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वयं इसकी घोषणा करते कहा कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाएगी। 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत तिवारी को मार गिराने की दावे की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कर रहे। इस न्यायिक जांच में भी त्वरित कार्रवाई हुई और गुरुवार को न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष एवं पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा बिलौटी गांव जाकर तथ्यों का पता लगाया। पीड़ित परिवार से मिले और उनसे आग्रह भी किया कि आपके पास जो भी तथ्य है उसे उपलब्ध कराएं ताकि जांच की दिशा में गति लाई जा सके।

न्यायिक के साथ सीबीआई जांच?

वरिष्ठ पत्रकार दीपक कोचगवे का मानना है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच का आदेश देकर अपना पक्ष साफ कर दिया कि गलत लोगों के साथ सरकार खड़ी नहीं है। वैसे भी एनकाउंटर ही नहीं कई हत्या, गोलीकांड को लेकर जब प्रदर्शन उठ खड़ा होता है तो सबसे बड़ी मांग न्यायिक जांच या सीबीआई जांच की मांग पार्टियां या पीड़ित परिवार करता है। ऐसे में सरकार की निष्पक्षता और भरत तिवारी के पीड़ित परिवार को विश्वास में लेने के लिए न्यायिक और सीबीआई जांच को साथ-साथ कर लिया जाए तो इस मसले में दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
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