इंदौर। स्वच्छता का सातवां आसमान छूने के लिए इंदौर कमर कसकर तैयार है। स्वच्छ सर्वेक्षण दल किसी भी दिन इंदौर आ सकता है। यह पहली बार होगा जब स्वच्छ सर्वे वर्षाकाल में हो रहा है। इंदौर में वर्षाकाल के दौरान जलजमाव और नालों में गाद की समस्या बहुत पुरानी है।
शहर की कई सड़क अल्पवर्षा में ही जलमग्न हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में स्वच्छता का सरताज बनना इंदौर के लिए आसान नहीं होगा। हालांकि नगर निगम की टीम ने कमर कस ली है। शहर में बेकलाइनें साफ की जा रही है। डिवाइडरों को भी साफ किया जा रहा है।
बारिश में हो रहे सर्वे को लेकर निगमायुक्त हर्षिका सिंह ने कहा कि यह चुनौती सिर्फ इंदौर नहीं बल्कि स्वच्छ सर्वेक्षण में शामिल सभी शहरों के सामने है। स्वच्छ सर्वेक्षण में अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग अंक निर्धारित हैं। सर्वेक्षण के मापदंडों के हिसाब से जोनल स्तर पर हमने दल तैयार किए हैं। हम किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहते।
वर्षाकाल के समय जो सर्वेक्षण दल आ रहा है उन्हें भी पता होगा कि वर्षाकाल के दौरान सर्वे में किन बातों का ध्यान रखना है। उन्हें भी पता है कि बारिश में जलजमाव हो सकता है। नाले सूखे नहीं मिलेंगे। यह चुनौती सिर्फ इंदौर ही नहीं बल्कि दूसरे शहरों के सामने भी रहेगी। हमें लगता है कि सर्वे दल भी इस बात का ध्यान रखेगा।
यहां है हम हैं तैयार
- शहर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन सिस्टम शत प्रतिशत काम कर रहा है। कचरा पेटियां भी नहीं है। कचरे के निबटान की व्यवस्था भी पर्याप्त है।
- हम कचरे से सीएनजी और खाद बना रहे हैं। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे का निपटान व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। समय-समय पर देश-विदेश से आने वाले मेहमान ट्रेंचिंग ग्राउंड का दौरा भी करते हैं।
- कचरे के पुर्नउपयोग में इंदौर आगे है। हमने 19 जोन में थ्रीआर सेंटर खोले हैं। थ्री आर (रिसायकल, रियूस और रिड्यूज) सिस्टम पूरे शहर में लागू कर दिया है।
-सफाईमित्रों के लिए जोन कार्यालयों पर सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है। जोन कार्यालयों में ही उनके स्वास्थ्य की नियमित जांच की व्यवस्था भी है।
-निगम के पास सफाई की अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। सीवेज लाइनों की सफाई रोबोटिक मशीनों से की जा रही है।
यह है हमारी कमजोरी
-शहर में हर दिन 900 मीटर सीवरेज लाइन बिछाई जा रही है। नर्मदा पेयजल और स्टार्म वाटर लाइन के अधूरे काम की वजह से शहर के कई मुख्य मार्ग खोदे पड़े हैं। शहर में मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट का काम भी चल रहा है। जगह-जगह मिट्टी परीक्षण के नाम पर गड्ढे खोदे पड़े हैं। इनकी वजह से पूरे शहर में धूल और मलबा नजर आता है।
- पिछली बार सर्वे के समय इंदौर के पास वाटर प्लस सर्टिफिकेट था। इस सर्टिफिकेट की वैधता दो वर्ष की थी जो समाप्त हो चुकी है। अब तक वाटर प्लस सर्टिफिकेट के लिए सर्वे नहीं हुआ है। इसके लिए स्वच्छ सर्वेक्षण में 1200 अंक निर्धारित हैं।
- शहर का नाला टेपिंग प्रोजेक्ट पूरी तरह से असफल साबित हो चुका है। कई जगह नाला टेपिंग को खोलना भी पड़ा है। नालों में अभी भी सीवरेज मिल रहा है। नालों से ठीक से गाद भी नहीं निकाली जा सकी है।
- नगर निगम भले ही दावा करे कि सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है लेकिन यह सही नहीं है। शहर में अब भी सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है।
- सार्वजनिक शौचालयों की सफाई व्यवस्था भी सही नहीं है। दावों के बावजूद शौचालयों में गंदगी है। कई जगह नल गायब हैं तो कहीं पानी नहीं आ रहा।











